पशुपालन करने वाले किसानों के पास सालभर बड़ी मात्रा में गोबर इकट्ठा हो जाता है, जिसे वे खेतों में खाद के रूप में काम लेते हैं। अधिकतर किसान इस गोबर को एक ही जगह खुले में जमा करते रहते हैं और बुआई से ठीक पहले इसे खेत में फैला देते हैं। लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि गोबर इस्तेमाल करने का यह तरीका पूरी तरह उचित नहीं है। असल में सही ढंग से तैयार की गई गोबर की खाद ही फसलों को अधिकतम लाभ देती है।
क्यों गलत है गोबर को खुले में रखना
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि गांवों में ज्यादातर किसान गोबर को खुले आसमान के नीचे ही पड़ा रहने देते हैं। तेज धूप और गर्मी के कारण गोबर में मौजूद कई लाभकारी जीवाणु और सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। यही जीवाणु मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और पौधों को पोषण देने में अहम भूमिका निभाते हैं। यानी खुले में रखने से गोबर के अच्छे और हानिकारक, दोनों तरह के जीवाणु खत्म हो जाते हैं।
कैसे तैयार करें अच्छी गोबर खाद
विशेषज्ञों के मुताबिक गोबर की खाद बनाने के लिए सबसे पहले किसी छायादार स्थान पर एक गड्ढा खोदना चाहिए। इसके बाद गोबर को उसी गड्ढे में भरकर रखना चाहिए। इस दौरान इस बात का खास ध्यान रखना जरूरी है कि गोबर में पर्याप्त नमी बनी रहे।
अगर गड्ढा उपलब्ध न हो तो गोबर को किसी छायादार जगह पर ढेर के रूप में भी रखा जा सकता है, लेकिन उसमें समय-समय पर नमी बनाए रखना आवश्यक है। धीरे-धीरे गोबर सड़कर भुरभुरा होने लगता है। जब नीचे का गोबर पूरी तरह भुरभुरा और काले रंग का दिखने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि खाद तैयार हो चुकी है। इस तरह तैयार की गई खाद मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और फसल उत्पादन बढ़ाने में कहीं अधिक प्रभावी साबित होती है।
खेत में कब और कैसे डालें यह खाद
कृषि वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि गोबर की खाद को बुआई से ठीक पहले नहीं डालना चाहिए। इसे खेती शुरू करने से कम से कम 20 से 25 दिन पहले खेत में डाल देना चाहिए। इसके बाद खेत की अच्छी तरह जुताई कर देनी चाहिए, ताकि खाद मिट्टी में पूरी तरह मिल जाए और उसका भरपूर फायदा फसल को मिल सके।
बाढ़ प्रभावित इलाकों के किसानों को सलाह दी जाती है कि वे बाढ़ आने से पहले ही गोबर की खाद खेतों में डालकर जुताई करवा लें। ऐसा करने से खाद मिट्टी में अच्छी तरह घुल-मिल जाती है और बाद में फसल को बेहतर पोषण मिलता है।
केंचुआ खाद भी छाया में ही बनाएं
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि केंचुआ खाद यानी वर्मी कम्पोस्ट तैयार करते समय भी छायादार स्थान का ही चुनाव करना चाहिए। गोबर में मौजूद कई लाभकारी जीवाणु और सूक्ष्म जीव केवल छाया और नमी वाले वातावरण में ही जीवित रह पाते हैं। तेज धूप पड़ते ही ये जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, जिससे खाद की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
उन्होंने किसानों को आगाह किया कि बिना सड़ी-गली या बिना उपचारित गोबर को सीधे खेत में नहीं डालना चाहिए। पहले उसे सही तरीके से खाद में बदलना जरूरी है, तभी उसका पूरा लाभ फसल और मिट्टी दोनों को मिल सकेगा।
https://hindi.news18.com/news/agriculture/do-not-apply-gobar-khad-directly-in-field-agricultural-scientist-said-right-method-benefits-will-double-local18-10554014.html