नौकरी छोड़ गांव लौटा युवा, ‘उपसरपंच चाय’ से बनाई अलग पहचान, बन गया मिसाल

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के एक युवक ने कतर की नौकरी छोड़कर मुंबई में मिले आइडिया से प्रेरित होकर अपने गांव में ‘उपसरपंच चाय’ नाम से स्टार्टअप शुरू किया और आज रोजाना सैकड़ों कप चाय बेचकर खुशहाल जीवन जी रहा है।

कभी विदेश में रोजी-रोटी की तलाश में गए एक युवक ने अब अपने ही गांव में चाय का छोटा-सा कारोबार खड़ा कर मिसाल कायम कर दी है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के रहने वाले रिजवान अख्तर ने विदेश की नौकरी को अलविदा कहकर अपने इलाके में ‘उपसरपंच चाय’ नाम से स्टार्टअप शुरू किया, जो अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

विदेश से लौटकर शुरू किया अपना कारोबार

रिजवान बताते हैं कि उनकी ‘उपसरपंच चाय’ की दुकान पर ग्राहकों के लिए लेमन टी, ग्रीन टी, गुड़ की चाय, ब्लैक कॉफी और सामान्य कॉफी समेत कुल पांच तरह के पेय उपलब्ध हैं, और इन सभी को वे खुद तैयार करते हैं। उनके अनुसार चाय बनाने की तकनीक और कारोबार चलाने का प्रशिक्षण उन्हें कंपनी की ओर से 10 दिनों तक दिया गया था।

मुंबई एयरपोर्ट पर मिला बिजनेस का आइडिया

रिजवान पहले विदेश में, यानी कतर में फिटर का काम किया करते थे। विदेश से भारत लौटते समय उनकी फ्लाइट मुंबई में थी। वहीं घूमते हुए उन्होंने एक चाय ब्रांड की दुकान देखी, जहां ग्राहकों की भारी भीड़ जुटी हुई थी। लोगों का चाय के प्रति यह उत्साह देखकर उनके मन में भी ऐसा ही कारोबार शुरू करने का विचार आया। गांव लौटते ही उन्होंने अपनी योजना पर काम शुरू कर दिया और 15 नवंबर से दुकान का संचालन शुरू कर दिया।

रोजाना बिक रहे 300 से 400 कप

रिजवान के मुताबिक उनका यह फैसला सही साबित हुआ। फिलहाल उनकी दुकान पर हर दिन करीब 300 से 400 कप चाय की बिक्री हो रही है। स्थानीय लोगों के बीच यह दुकान तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है।

परिवार के लिए चुना अपना देश

रिजवान कहते हैं कि विदेश में सुविधाएं और कमाई दोनों ज्यादा हैं, मगर वहां परिवार से दूर रहना पड़ता है। उनका मानना है कि भारत में कमाई भले ही कम हो, पर परिवार के साथ रहने का सुख कहीं अधिक मायने रखता है। यही वजह रही कि उन्होंने विदेश की नौकरी छोड़कर अपने गांव में कारोबार शुरू करने का निर्णय लिया।

बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना

रिजवान दो बेटों के पिता हैं, जिनमें एक बेटा दो साल और दूसरा चार साल का है। वे कहते हैं कि अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देना चाहते हैं। उनका मानना है कि बच्चों का भविष्य क्या होगा, यह समय तय करेगा, लेकिन वे चाहते हैं कि उन्हें हर संभव अवसर मिले।

10वीं तक पढ़ाई, फिर काम का जुनून

रिजवान ने बताया कि उन्होंने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। इसके बाद काम करने का जुनून इस कदर बढ़ गया कि वे आगे की पढ़ाई नहीं कर सके। आज वे अपने फैसलों से पूरी तरह संतुष्ट हैं और कहते हैं कि अपनी जिंदगी से बेहद खुश हैं।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा

रिजवान अख्तर की यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार के अवसर तलाश रहे हैं। विदेश की नौकरी छोड़कर अपने गांव में कारोबार शुरू कर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि मेहनत और सही सोच के साथ छोटे कारोबार भी बड़ी सफलता की राह खोल सकते हैं।

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