छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में गर्मी के मौसम में धान और उड़द की खेती कर रहे किसानों के लिए बेमौसम बारिश परेशानी का सबब बन गई है। जिले के कई गांवों में धान की फसल पकने के कगार पर पहुंच चुकी है और बालियां फूटने लगी हैं। ऐसे समय में हो रही बारिश ने किसानों की चिंता काफी बढ़ा दी है। हालांकि कृषि जानकारों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, बस कुछ सावधानियां बरतकर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
क्यों बढ़ी किसानों की चिंता
सरगुजा के किसान इस बार गर्मी के मौसम में भी धान और उड़द की खेती कर रहे हैं। खेतों में धान की फसल पककर कटाई की स्थिति में आ चुकी है और बालियां निकल आई हैं। ऐसे में लगातार हो रही बारिश से बालियों के झड़ने का खतरा बना हुआ है। यदि यही स्थिति बनी रही तो धान के साथ-साथ उड़द की खेती भी प्रभावित हो सकती है, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विशेषज्ञ की राय
कृषि विशेषज्ञ गंगा राम ने बताया कि इस समय बड़ी संख्या में किसानों के खेतों में धान की फसल लगी हुई है। कई इलाकों में धान में बालियां निकल चुकी हैं और फसल कटाई की अवस्था में पहुंच गई है। उनके अनुसार, ऐसे समय में लगातार बारिश होने से धान की बालियों के झड़ने की आशंका बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि बारिश के दौरान फसल की कटाई करना किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। गीली फसल को खेत से निकालने और उसे सुरक्षित रखने में काफी कठिनाई होती है। इसके अलावा अधिक नमी के कारण धान के सड़ने और उसकी गुणवत्ता खराब होने की संभावना भी बढ़ जाती है।
कैसे करें बचाव
कृषि विशेषज्ञ ने किसानों को सलाह दी है कि वे बारिश के दौरान फसल की कटाई न करें और मौसम के साफ होने का इंतजार करें। जब मौसम सूखा रहे, तभी कटाई करना उचित होगा, अन्यथा उत्पादन पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ की मानें तो इन सुझावों को अपनाकर किसान अपनी फसलों को बीमारी और मौसम की मार दोनों से बचा सकते हैं।
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