परिवारवाद और क्षेत्रीय दलों का घाटा
राजनीति में परिवारवाद की सबसे बड़ी कीमत अक्सर क्षेत्रीय पार्टियों को ही चुकानी पड़ती है। यह सिलसिला कोई नया नहीं है और हाल के वर्षों में कई राज्यों में इसका असर साफ देखा गया है।
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की मिसाल
ताजा उदाहरण पश्चिम बंगाल का सामने आया है, जहां ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाने का परिणाम भुगत रही हैं। इसी तरह तमिलनाडु में एमके स्टालिन अपने बेटे उदय निधि को आगे बढ़ा रहे थे, लेकिन ममता की तरह उनकी सत्ता भी समाप्त हो गई।
बिहार और उत्तर प्रदेश का हाल
बिहार में तेजस्वी यादव के लिए परिवारवाद ही परेशानी की जड़ बन गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के परिवारवाद ने अखिलेश यादव की राह में बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दीं।
कुछ नेता बने अपवाद
इन सबके बीच जेएमएम के हेमंत सोरेन और नेशनल कान्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला जैसे नेता अपवाद रहे हैं। परिवारवाद के आरोपों के बावजूद ये नेता मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं।
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