उत्तराखंड की मशहूर सरोवर नगरी नैनीताल में इन दिनों पर्यटन सीजन पूरे उफान पर है, मगर बेहतर सुविधाएं देने के प्रशासनिक दावे शहर के प्रवेश द्वारों पर ही दम तोड़ते दिख रहे हैं। पार्किंग भर जाने का हवाला देकर रूसी बाईपास समेत कई एंट्री पॉइंट्स पर बड़ी तादाद में पर्यटकों के वाहन रोके जा रहे हैं। जिन सैलानियों के पास होटल बुकिंग नहीं है, उन्हें शहर में घुसने नहीं दिया जा रहा और उनके लिए शटल सेवा के जरिए नैनीताल पहुंचाने का इंतजाम किया गया है।
परेशानी की बात यह है कि जिन जगहों पर पर्यटकों को रोका जा रहा है, वहां बुनियादी सुविधाओं की भारी किल्लत है। सैलानियों का कहना है कि इन स्थलों पर न साफ-सुथरे शौचालय हैं, न खाने-पीने की ठीक व्यवस्था और न ही आराम करने का कोई इंतजाम। ऐसे में परिवार के साथ आने वाले लोगों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
कई पर्यटकों का आरोप है कि प्रशासन ने भरोसा दिलाया था कि शहर की सारी पार्किंग भरने के बाद ही वाहनों को बाहर रोका जाएगा, लेकिन हकीकत इसके उलट है। उनका दावा है कि शहर के भीतर कई पार्किंग खाली होने के बावजूद वाहनों को आगे नहीं जाने दिया जा रहा।
‘अब दोबारा कभी नहीं आएंगे नैनीताल’
रामपुर से पहुंचे पर्यटक नावेद कुरैशी ने बताया कि वे सुबह करीब 10 बजे भवाली से नैनीताल के लिए रवाना हुए थे, मगर रास्ते में ही उन्हें रोक दिया गया। इसके बाद करीब 30 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटकर वे रूसी बाईपास पहुंचे, जहां से भी उन्हें शहर में जाने की इजाजत नहीं मिली।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने होटल बुकिंग का प्रमाण मांगा, और होटल संचालक से बातचीत कराने के बावजूद उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया गया। परिवार सहित घंटों परेशान होने के बाद आखिरकार उन्हें लौटना पड़ा। नावेद का कहना है कि यहां न तो यातायात व्यवस्था स्पष्ट है और न ही पर्यटकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं हैं, इसलिए वे अब कभी नैनीताल नहीं आएंगे।
‘न जाम, न भीड़, फिर भी रोक दिया’
लखनऊ से आए नितिन सिंह ने रूसी बाईपास की सबसे बड़ी समस्या वहां के गंदे शौचालयों को बताया। उनके मुताबिक शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि उनका इस्तेमाल करना तक मुश्किल है। उन्होंने बताया कि काठगोदाम में उन्हें कुछ और जानकारी दी गई, जबकि रूसी बाईपास पहुंचने पर होटल बुकिंग को अनिवार्य बता दिया गया। मौके पर होटल बुक कराने पर बेहद ऊंचा किराया वसूला जा रहा है।
नितिन ने यहां की महंगाई पर भी नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि ऑनलाइन होटलों ने भी टैरिफ बढ़ा दिए हैं, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेताया कि अगर प्रशासन बेहतर सुविधाएं और दुरुस्त व्यवस्था नहीं देगा तो आने वाले समय में पर्यटक नैनीताल आने से कतराएंगे।
होटल बुकिंग के बिना प्रवेश नहीं
आगरा से पहुंचे पर्यटक सूरज कुमार ने बताया कि उन्हें भी होटल बुकिंग न होने के कारण शहर में नहीं घुसने दिया गया। उनका कहना है कि अगर बुकिंग नहीं हो पाई तो उन्हें भी वापस लौटना पड़ेगा। उन्होंने बाकी सैलानियों को सलाह दी कि नैनीताल आने से पहले होटल की बुकिंग पक्की कर लें और भारी भीड़ को ध्यान में रखकर ही यात्रा की योजना बनाएं।
खाली पार्किंग के बावजूद रोके जा रहे वाहन
इस पूरे मसले पर नैनीताल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट ने भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि पर्यटन सीजन की तैयारियां पहले से तय रहती हैं और व्यवस्थाएं समय रहते बना ली जानी चाहिए थीं। उन्होंने बताया कि इस समय नैनीताल की कई पार्किंग खाली पड़ी हैं, फिर भी वाहनों को शहर में नहीं जाने दिया जा रहा।
बिष्ट का मानना है कि पार्किंग की असल स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही वाहनों को रोका जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आमतौर पर पार्किंग 70 प्रतिशत भर जाने के बाद ही वाहनों को बाहर रोका जाता है, मगर इस बार हालात अलग हैं।
पर्यटन सीजन में लाखों सैलानियों को अपनी ओर खींचने वाले नैनीताल के लिए यह स्थिति लगातार चिंता का कारण बनती जा रही है। अगर यातायात प्रबंधन और पर्यटक सुविधाओं में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो सैलानियों का रुख दूसरे पर्यटन स्थलों की तरफ मुड़ सकता है, जिसका सीधा असर स्थानीय पर्यटन कारोबार और होटल उद्योग पर पड़ेगा।
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