देश के हृदय प्रदेश मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में आज से BRICS एग्रीकल्चर वर्किंग ग्रुप की पांच दिवसीय बैठक का आगाज हो गया है। 9 से 13 जून तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में 21 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ मिलकर वैश्विक खेती के भविष्य का खाका तैयार करेंगे। भारत की अध्यक्षता में हो रहा यह सम्मेलन खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, जलवायु अनुकूल खेती और कृषि नवाचार जैसे अहम मुद्दों पर केंद्रित रहेगा।
वैश्विक कृषि कूटनीति का खाका तैयार होगा इंदौर में
यह आयोजन महज एक बैठक भर नहीं, बल्कि वैश्विक कृषि कूटनीति का बड़ा मंच है। पांच दिन तक चलने वाले इस मंथन में दुनिया के करोड़ों किसानों की आमदनी बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा को मजबूती देने, कृषि व्यापार का विस्तार करने और खेती को तकनीक आधारित बनाने की रणनीति बनेगी। सम्मेलन के समापन पर सदस्य एवं सहयोगी देशों की ओर से एक संयुक्त घोषणा-पत्र (Joint Declaration) जारी किए जाने की संभावना है, जो आगामी वर्षों की कृषि नीतियों को दिशा देगा।
AI, मशीन लर्निंग और स्मार्ट फार्मिंग पर खास जोर
मौजूदा दौर में खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ना इस सम्मेलन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, डिजिटल एग्रीकल्चर और क्लाइमेट स्मार्ट फार्मिंग जैसे विषयों पर विशेष चर्चा होगी। मकसद यह है कि परंपरागत खेती को नई तकनीकों से जोड़कर किसानों की लागत घटाई जाए और उत्पादन बढ़ाया जा सके।
ऑर्गेनिक खेती और जलवायु अनुकूल कृषि पर साझा रणनीति
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर के बीच BRICS देश टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल खेती पर साझा रणनीति बनाएंगे। मिट्टी की सेहत, प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादन, जल संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग जैसे विषय भी एजेंडे का हिस्सा हैं।
मध्य प्रदेश के कृषि उत्पादों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच
यह सम्मेलन मध्य प्रदेश के खास कृषि उत्पादों के लिए भी बड़ा अवसर लेकर आया है। झाबुआ का सफेद मक्का, नरसिंहपुर का गुड़, मंडला के मिलेट्स, छिंदवाड़ा की चिरौंजी और बुरहानपुर के केले से बने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। इन उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने और वैश्विक बाजारों तक पहुंच की संभावनाओं पर भी मंथन होगा।
56 दुकान से मांडू तक, मालवा की संस्कृति देखेंगे विदेशी मेहमान
कृषि सम्मेलन के साथ-साथ इंदौर और मालवा की सांस्कृतिक विरासत भी दुनिया के सामने रखी जा रही है। विदेशी प्रतिनिधियों का आना शुरू हो चुका है। मेहमानों को विश्व प्रसिद्ध 56 दुकान, सराफा बाजार और ऐतिहासिक मांडू समेत अन्य पर्यटन स्थलों की सैर कराई जाएगी। इससे मध्य प्रदेश की संस्कृति, खानपान और अतिथि सत्कार की वैश्विक पहचान और पुख्ता होगी।
‘विकसित भारत 2047’ के विजन को मिलेगी रफ्तार
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव इस आयोजन को भारत की कृषि नेतृत्व क्षमता दिखाने का मौका बता चुके हैं। भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान यह सम्मेलन विकसित भारत 2047, आत्मनिर्भर भारत और कृषि आधारित आर्थिक विकास के विजन को मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
क्यों अहम है BRICS कृषि सम्मेलन?
BRICS देशों की वैश्विक खेती में हिस्सेदारी बेहद बड़ी है, जिससे इनके फैसलों का असर दुनिया भर पर पड़ता है।
- दुनिया की लगभग 42% कृषि भूमि इन्हीं देशों के पास है।
- विश्व के करीब 68% छोटे किसान BRICS देशों में रहते हैं।
- वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन में इन देशों की हिस्सेदारी लगभग 45% है।
खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार और किसान कल्याण से जुड़े वैश्विक निर्णयों में BRICS की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अगले पांच दिनों तक इंदौर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की कृषि नीति और कृषि कूटनीति का केंद्र बना रहेगा। यहां होने वाली चर्चाएं आने वाले वर्षों में खेती, खाद्य सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और किसानों की समृद्धि के लिए नई राह तय कर सकती हैं। भारत की अगुवाई में बनने वाला यह कृषि रोडमैप दुनिया भर के किसानों के भविष्य को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
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