एलियंस ने भेजा संदेश तो तुरंत जवाब देना पड़ सकता है भारी, 97 देशों के 1000 वैज्ञानिकों ने बनाई '8 सूत्रीय योजना'

दुनिया भर के वैज्ञानिकों के एक बड़े समूह ने एलियंस के संभावित संपर्क से निपटने के लिए एक '8 पॉइंट प्लान' तैयार किया है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि एलियंस का संदेश मिलने पर इंसानों को कभी भी जल्दबाजी में जवाब नहीं भेजना चाहिए।

एलियंस यानी परग्रहवासियों के अस्तित्व को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। कुछ लोग दावा करते हैं कि उनकी मुलाकात दूसरे ग्रहों के जीवों से हुई, तो कुछ का कहना है कि एलियंस ने उन्हें अगवा तक कर लिया था। हालांकि इन दावों का अब तक कोई पुख्ता प्रमाण सामने नहीं आया है। इसी बीच वैज्ञानिकों के एक समूह ने इस विषय पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है।

विशेषज्ञों ने इंसानों को कड़ी हिदायत दी है कि अगर ब्रह्मांड के किसी दूरस्थ हिस्से से एलियंस पृथ्वी के लोगों से संपर्क करने की कोशिश करें, तो हमें तुरंत पलटकर कोई जवाब नहीं देना चाहिए। शुरुआत में उनके संदेश को पूरी तरह अनदेखा करने और संयमित रवैया अपनाने की सलाह दी गई है। यह असामान्य सुझाव उसी विशेष ‘8 सूत्रीय योजना’ का हिस्सा है, जिसमें विस्तार से बताया गया है कि किसी वास्तविक एक्स्ट्रा-टेरेस्ट्रियल सभ्यता का पता चलने पर मानव जाति को चरणबद्ध तरीके से क्या करना चाहिए।

किसने तैयार किए ये दिशा-निर्देश

एक रिपोर्ट के अनुसार, इन दिशा-निर्देशों को ‘इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एयरोनॉटिक्स’ ने प्रकाशित किया है। यह 97 देशों के 1,000 से अधिक शीर्ष वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का एक प्रतिष्ठित वैश्विक संगठन है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल से जुड़ी तथाकथित ‘यूएफओ फाइल्स’ के सार्वजनिक होने के बाद एलियंस और यूएफओ को लेकर दुनिया भर में बहस और जांच-पड़ताल काफी तेज हो गई है।

इस रिपोर्ट का मुख्य मकसद उन वैज्ञानिकों के लिए “सबसे बेहतर तौर-तरीके” तय करना है, जो एक्स्ट्रा-टेरेस्ट्रियल सिग्नलों या जीवों की खोज में जुटे हैं। साथ ही इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि आम जनता को इस ऐतिहासिक खोज की जानकारी कब और कैसे दी जाएगी। चूंकि पृथ्वी को लेकर एलियंस का नजरिया क्या है, यह कोई नहीं जानता, इसलिए आशंका यह भी है कि वे भारी तबाही मचा सकते हैं।

इंसानों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी

इस वैज्ञानिक रिपोर्ट की सबसे अहम सिफारिश यह है कि अगर एलियंस किसी रेडियो सिग्नल या किसी अन्य माध्यम से वैज्ञानिकों से संपर्क करते हैं, तो पृथ्वी की ओर से तब तक कोई जवाबी संदेश नहीं भेजा जाना चाहिए, जब तक इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विचार-विमर्श न हो जाए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैज्ञानिकों को आपस में और वैश्विक स्तर पर इस पर पूरी तरह सहयोग और चर्चा करनी चाहिए कि एलियंस को जवाब दिया जाए या नहीं, और अगर जवाब देना हो तो उस संदेश में क्या लिखा जाए। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पूरी परामर्श प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र और अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए ही चलाई जानी चाहिए।

रिपोर्ट में साफ कहा गया है, “जब तक इस तरह की अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल जाता, तब तक अंतरिक्ष में हमारी ओर से कोई भी जवाबी संदेश नहीं भेजा जाना चाहिए।” वैज्ञानिकों ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में एलियंस को दिए जाने वाले संभावित जवाबों के सटीक तरीके तय करने के लिए एक अलग वैश्विक समझौता, घोषणापत्र या व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि इस संवेदनशील मुद्दे पर समूची मानव जाति का रुख एकजुट और जिम्मेदार बना रहे।

छिपाई नहीं जाएगी कोई खोज

अंतरिक्ष विज्ञान और एलियंस में रुचि रखने वालों के लिए राहत की बात यह है कि इस गाइडलाइन में किसी भी एलियन एनकाउंटर या खोज को दुनिया से छिपाने या दबाने की बात नहीं कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों पर संपर्क के शुरुआती प्रयासों को सार्वजनिक करने की कोई कानूनी बाध्यता तो नहीं है, लेकिन एक बार खोज की पुष्टि हो जाने पर संबंधित वैज्ञानिक संस्थानों को पूरी दुनिया के सामने पूरी तरह ईमानदार और पारदर्शी रहना होगा। दिशा-निर्देशों के अनुसार, इन संस्थानों और संगठनों को समाचार एजेंसियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य सार्वजनिक संचार माध्यमों के सभी जायज सवालों के जवाब देने होंगे।

एलियन प्रोटोकॉल के 8 पॉइंट

  1. खोज की सत्यता की जांच: अंतरिक्ष से मिलने वाले किसी भी सिग्नल की बारीकी से पड़ताल हो कि वह वाकई एलियंस का है या नहीं।
  2. सावधानी से सूचना का प्रबंधन: खोजी गई संवेदनशील जानकारियों और डेटा को बेहद सतर्कता से संभाला जाए।
  3. सटीकता और ईमानदारी: जनता और दुनिया को दी जाने वाली हर जानकारी पूरी तरह सच्ची और बिना किसी देरी के हो।
  4. पूर्ण प्रकटीकरण: एलियंस से जुड़ी खोज के निष्कर्षों को पूरी तरह, खुले तौर पर और बिना कुछ छिपाए सामने रखा जाए।
  5. डेटा का संरक्षण: खोज से जुड़े सभी वैज्ञानिक डेटा और सिग्नलों के रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और शोध के लिए साझा किए जाएं।
  6. साक्ष्यों की सुरक्षा: एलियंस की मौजूदगी साबित करने वाले भौतिक या डिजिटल सबूतों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
  7. जवाबी संदेश पर रोक: वैश्विक सहमति और संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी के बिना अंतरिक्ष में कोई जवाबी संदेश न भेजा जाए।
  8. उच्चतम नैतिक मानक: इस पूरी प्रक्रिया में विज्ञान और मानवता के सर्वोच्च नैतिक मूल्यों का पालन हो।

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