कोटा महंत हत्याकांड में नया मोड़: ट्रस्ट, मठ की संपत्ति और संतों की रंजिश पर सिमटी जांच

कोटा के चंद्रेशल मठ में महंत देवानंद महाराज की हत्या के चार दिन बाद भी गुत्थी नहीं सुलझी है। पुलिस नए ट्रस्ट गठन, संपत्ति विवाद और संतों के पुराने मतभेद समेत हर पहलू की पड़ताल कर रही है।

कोटा के चंद्रेशल मठ में महंत देवानंद महाराज की हत्या का मामला हर बीतते दिन के साथ नए सवाल खड़े कर रहा है। वारदात को चार दिन गुजर चुके हैं, मगर पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। इस दौरान जांच का घेरा लगातार फैलता जा रहा है। अब अनुसंधान सिर्फ हत्या की घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मठ की संपत्ति, नए ट्रस्ट के गठन और संतों के बीच पुराने मतभेदों तक पहुंच गया है।

इस हत्या ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। शुरू में इसे एक सामान्य हत्या के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे पड़ताल आगे बढ़ी, कई ऐसे पहलू उभरकर सामने आए जिन्होंने पुलिस का ध्यान अपनी ओर खींचा। फिलहाल जांच टीम हर संभावित कोण पर काम कर रही है।

नए ट्रस्ट की तैयारी और उससे पहले ही वारदात

पुलिस की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि महंत देवानंद महाराज चंद्रेशल मठ के लिए एक नया ट्रस्ट बनाने की तैयारी में जुटे थे। इसके लिए 21 सदस्यीय समिति का प्रस्ताव भी तैयार किया जा चुका था। बताया जा रहा है कि 10 जून को इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय होना था, लेकिन उससे पहले ही महंत की हत्या कर दी गई।

यही कारण है कि पुलिस इस पहलू को गंभीरता से देख रही है। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि कहीं ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया और हत्या के बीच कोई कड़ी तो नहीं जुड़ी हुई।

संतों के बीच पुराने विवाद भी जांच के दायरे में

पड़ताल के दौरान यह जानकारी भी मिली है कि मठ में दो संतों के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही थी। पुलिस इस विवाद की पूरी पृष्ठभूमि को समझने में जुटी है। अधिकारियों का मानना है कि पुराने मतभेदों और हाल की घटनाओं को आपस में जोड़कर देखने की आवश्यकता है।

पुलिस अब तक संत नंदनवन महाराज समेत 10 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। हालांकि अभी तक किसी भी व्यक्ति को क्लीन चिट नहीं दी गई है। जांच टीम हर बयान और हर सूचना का आपस में मिलान कर रही है।

मठ की आय और संपत्ति पर भी उठ रहे सवाल

चंद्रेशल मठ की आर्थिक स्थिति भी अब जांच का हिस्सा बन चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मठ की सालाना आय करीब 40 से 50 लाख रुपये बताई जा रही है। ऐसे में संपत्ति और उसके प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।

पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि मठ की व्यवस्था, आमदनी और आगे के प्रबंधन को लेकर कहीं कोई विवाद तो नहीं था। जांच अधिकारी इससे जुड़े दस्तावेजों और अन्य जानकारियों को भी खंगाल रहे हैं।

हर कोण पर एक साथ काम कर रही पुलिस

फिलहाल पुलिस संपत्ति विवाद, ट्रस्ट गठन, संतों की आपसी अनबन और व्यक्तिगत रंजिश समेत हर संभावित वजह की जांच में जुटी है। आश्रम में मौजूद लोगों, ग्रामीणों और पुराने संतों से लगातार पूछताछ की जा रही है।

चार दिन बीतने के बाद भी हत्या की गुत्थी पूरी तरह नहीं सुलझ पाई है, लेकिन जांच का घेरा जितना बढ़ रहा है, उतने ही नए सवाल उठ रहे हैं। अब हर किसी की निगाहें पुलिस की पड़ताल पर टिकी हैं कि आखिर महंत देवानंद महाराज की हत्या के पीछे असली कारण क्या था और इस रहस्य से पर्दा कब उठेगा।

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