एक गांव, एक जैसी जमीन और फिर भी फर्क: किसी को मिल रहे 6 हजार तो किसी की किस्त बंद, जानिए असली वजह

फरीदाबाद में कई किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभ से वंचित हैं, जबकि कुछ को नियमित किस्तें मिल रही हैं। जमीन और दस्तावेज होने के बावजूद सहायता न मिलने से किसान परेशान हैं।

केंद्र सरकार किसानों की आर्थिक हालत मजबूत करने के मकसद से कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सबसे अहम योजनाओं में गिनी जाती है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक मदद तीन बराबर किस्तों में दी जाती है। लेकिन फरीदाबाद में कई किसान ऐसे हैं जिन्हें इस योजना का फायदा नहीं मिल पा रहा।

कुछ किसानों को पहले इसका लाभ मिलता था, मगर अब उनकी किस्तें रुक गई हैं। वहीं कई किसान आज भी हर साल इसका लाभ उठा रहे हैं। ऐसे में जिन किसानों को मदद नहीं मिल रही, वे खासे परेशान नजर आ रहे हैं।

'जमीन मेरे नाम, फिर भी लाभ नहीं'

किसान कुंवर दास बताते हैं कि उन्हें इस योजना का कोई फायदा नहीं मिल रहा, जबकि उनके भाइयों को इसका लाभ मिल रहा है। उनके पास एक एकड़ जमीन है और वह जमीन उनके अपने नाम है, इसके बावजूद उन्हें मदद नहीं मिल पा रही।

उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने कागजात भी भरे थे, लेकिन उसके बाद भी पैसा नहीं आया। उनकी उम्र अब 61 साल हो चुकी है और न तो इस योजना का लाभ मिल रहा है और न ही पेंशन। उन्होंने यह जमीन साल 2002 में ली थी और जमीन उनकी अपनी होने के बाद भी उन्हें योजना से वंचित रहना पड़ रहा है।

तीन साल से एक भी किस्त नहीं

किसान कुंवर पाल कहते हैं कि पहले उन्हें सरकार की यह योजना मिल रही थी, लेकिन अब बंद हो गई है। करीब तीन साल तक उन्हें इसका फायदा मिला, मगर उसके बाद यह अपने आप रुक गई। बंद होने की वजह उन्हें खुद भी मालूम नहीं है।

उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने दोबारा कागज जमा करने को कहा, जिसके बाद वह पलवल जाकर सारे दस्तावेज दोबारा जमा कर आए, फिर भी योजना चालू नहीं हुई। उनके पास करीब एक एकड़ जमीन है। साल 2023 तक उन्हें इसका लाभ मिला, लेकिन पिछले तीन साल से एक भी किस्त नहीं आई।

इनकम टैक्स भरने पर कट गया नाम

किसान महेंद्र बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें इस योजना का लाभ मिला था, पर अब नहीं मिल रहा। उनका मानना है कि लाभ इसलिए कटा क्योंकि वह इनकम टैक्स भरते हैं। उनके पास चार एकड़ जमीन है और पांच एकड़ से कम होने के बाद भी योजना का फायदा नहीं मिल रहा।

उन्होंने कहा कि कई साल पहले उन्हें किस्तें मिलती थीं, लेकिन इनकम टैक्स भरने की वजह से नाम काट दिया गया। योजना शुरू होने के समय उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज अधिकारियों को सौंप दिए थे।

'छह साल से नियमित मिल रहा लाभ'

किसान ज्योति चरण बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव के रहने वाले हैं और उनकी खेती सुनपेड़ गांव में है। उनके पास एक एकड़ अपनी जमीन है। वह बताते हैं कि उनके पिता को इस योजना का लाभ मिलता है और जमीन पिता के नाम होने की वजह से वह भी इसका फायदा उठा रहे हैं।

उनके मुताबिक साल में तीन किस्तें आती हैं और हर किस्त में 2,000 रुपये मिलते हैं, यानी कुल मिलाकर साल भर में 6,000 रुपये की मदद मिलती है। वह पिछले छह साल से इस योजना का लाभ ले रहे हैं।

आवेदन और केवाईसी की प्रक्रिया

ज्योति चरण बताते हैं कि आवेदन के लिए जमीन की फर्द और आधार कार्ड लेकर जाना पड़ता है। शाहपुर कलां गांव में अधिकारी आए थे, वहीं उन्होंने कागज जमा किए और करीब दो-तीन महीने बाद पैसे आने शुरू हो गए।

उन्होंने बताया कि हर तीन महीने में एक बार किस्त सीधे खाते में आती है और जिनके नाम जमीन होती है, उन्हें ही इसका लाभ मिलता है। समय-समय पर केवाईसी भी होती रहती है और कुछ दिन पहले भी उन्हें बुलाया गया था। अधिकारियों ने साफ कहा था कि अगर हर साल किस्त चाहिए तो आईडी जरूर बनवा लें, क्योंकि पैसे सीधे खाते में भेजे जाते हैं।

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