सस्पेंस से भरी फिल्मों में अक्सर देखा जाता है कि कैसे एक लाश पूरी पुलिस की नींद उड़ा देती है, मगर महाराष्ट्र के बुलढाणा में जो घटना सामने आई, उसने किसी भी फिल्मी पटकथा को भी पीछे छोड़ दिया। जंगल में एक कटी हुई लाश मिलती है, एक पिता खुद आगे आकर अपनी बेटी की हत्या का गुनाह कबूल करता है और बेटे के साथ जेल चला जाता है। पुलिस केस को बंद करने ही वाली होती है कि वही 'मरी हुई' मानी जा रही लड़की जिंदा-सलामत थाने में आ खड़ी होती है। इसी एक मोड़ ने पूरी पुलिस व्यवस्था को हिलाकर रख दिया।
कहां से शुरू हुई कहानी: जंगल में मिली बेसिर लाश
26 अप्रैल को बुलढाणा जिले के ज्ञानगंगा अभयारण्य (वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी) के जंगल में पुलिस को एक अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ। हत्यारे ने पहचान मिटाने के मकसद से महिला का सिर धड़ से अलग कर दिया था और शरीर को आंशिक रूप से जला भी दिया था।
घटनास्थल के नजदीक से पुलिस को महिला की महंगी सैंडल और कुछ कपड़े मिले। शव की हालत और बरामद सामान से ऐसा अंदाजा लगा कि मृतका किसी संपन्न या अच्छे परिवार से ताल्लुक रखती थी।
'दृश्यम' स्टाइल में कहानी का पहला मोड़
जब पुलिस ने हाल ही में लापता हुई लड़कियों के रिकॉर्ड की पड़ताल की, तो उन्हें शिवानी कलमेकर नाम की लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट मिली। हुलिए को देखकर पुलिस ने मान लिया कि जंगल में मिली लाश शिवानी की ही है।
इसके बाद पुलिस ने शिवानी के परिवार को बुलाकर पूछताछ शुरू की और तभी कहानी ने हैरान कर देने वाला रुख ले लिया। शिवानी के पिता ने खुद पुलिस के सामने स्वीकार कर लिया कि अपनी बेटी की हत्या उन्होंने ही की है।
इसी झूठे कबूलनामे को आधार बनाकर पुलिस ने शिवानी के पिता और भाई को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस को भरोसा हो गया कि मामला सुलझ गया है।
जब 'मुर्दा' खुद चलकर थाने पहुंचा
इस पूरे रहस्य का सबसे बड़ा मोड़ 28 मई को आया। जिस शिवानी को मरा हुआ मानकर उसके पिता जेल में बंद थे, वही शिवानी अचानक जिंदा और बिल्कुल सही-सलामत थाने पहुंच गई।
शिवानी ने पुलिस के सामने खड़े होकर कहा कि वह जीवित है और उसके पिता तथा भाई पूरी तरह बेकसूर हैं, इसलिए उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। उसके सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और पुलिस की बुनी हुई पूरी कहानी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।
अब पुलिस के सामने कौन-सी बड़ी चुनौतियां
शिवानी के जिंदा लौटने के बाद यह मामला बुलढाणा पुलिस के लिए एक बड़ी पहेली बन गया है। फिलहाल जांच मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर केंद्रित है।
आखिर कत्ल किसका हुआ
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जंगल में मिली लाश शिवानी की नहीं थी, तो वह किस लड़की की है। पुलिस अब नए सिरे से राज्य और आसपास के जिलों की गुमशुदगी रिपोर्ट खंगाल रही है। महंगी सैंडल को आधार बनाकर हाई-प्रोफाइल परिवारों से गायब हुई लड़कियों की सूची तैयार की जा रही है।
पिता ने झूठा जुर्म क्यों कबूला
पुलिस इस बात से हैरान है कि कोई पिता अपनी जिंदा बेटी की हत्या का इल्जाम अपने सिर क्यों लेगा। क्या उसे सचमुच लगा कि लाश उसकी बेटी की है, या फिर वह किसी और को बचाने के लिए जेल गया था? पुलिस इस झूठे कबूलनामे के पीछे की साजिश की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
फॉरेंसिक और डीएनए जांच
पुलिस ने अब मृतका के शरीर के अंगों और डीएनए सैंपल को फॉरेंसिक लैब भेज दिया है, ताकि जांच का दायरा बढ़ाया जा सके।
कौन है शिवानी
शिवानी की उम्र करीब 20 से 22 साल के बीच है। वह बुलढाणा जिले के मोताला तालुका के रोहिणखेड गांव की रहने वाली है।
अप्रैल के महीने में वह अचानक अपने घर से गायब हो गई थी। काफी खोजबीन के बाद भी जब उसका पता नहीं चला, तो परिवार ने स्थानीय बोराखेड़ी पुलिस स्टेशन में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में जब पुलिस ने उसका शव मिलने का दावा किया, तो 28 मई को वह खुद चलकर थाने पहुंच गई और बताया कि वह अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी और पूरी तरह सुरक्षित है।
शिवानी का परिवार: पिता और भाई कौन
गजानन कलमेकर: शिवानी के पिता का नाम गजानन कलमेकर है। जंगल में अज्ञात लाश मिलने पर उन्होंने पुलिस के सामने यह झूठा बयान दे दिया कि उन्होंने 'ऑनर किलिंग' के तहत अपनी बेटी को मार डाला है। पुलिस के मुताबिक शव काफी हद तक जल चुका था, इसलिए संभव है कि घबराहट या गलतफहमी में पिता ने उस लाश को अपनी बेटी समझ लिया हो।
कृष्णा कलमेकर: शिवानी के भाई का नाम कृष्णा कलमेकर है। पिता के झूठे कबूलनामे के बाद पुलिस ने कृष्णा को भी सह-आरोपी बनाते हुए पिता के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
शिवानी के सामने आते ही पुलिस ने तुरंत अदालत को इस नए मोड़ की जानकारी दी और कानूनी प्रक्रिया के तहत गजानन कलमेकर तथा कृष्णा कलमेकर को जेल से रिहा करने की कार्यवाही फौरन शुरू कर दी गई।
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