दिल्ली इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है और इसी तपती धूप के बीच राजधानी की एक बेहद पुरानी और अनोखी ड्रिंक लोगों की जुबान पर चढ़ी हुई है। हर रोज बड़ी तादाद में सैलानी दिल्ली पहुंचते हैं और शहर घूमने के बाद इस शाही पेय का स्वाद उनके सिर चढ़कर बोलता है। इसे बनाने का तरीका भी इतना अलग है कि एक बार पीने वाला इसका जायका भुला नहीं पाता।
गर्मियों की शुरुआत होते ही दिल्ली का मशहूर बाजार चांदनी चौक इसी ड्रिंक से सज जाता है। यह कोई और नहीं, बल्कि रबड़ी फालूदा है। ऊपर से डाले गए ड्राई फ्रूट्स और गुलाब का शरबत इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देते हैं। जो एक बार इसका स्वाद ले लेता है, वह बार-बार यहां खिंचा चला आता है। यही वजह है कि पुरानी दिल्ली की यह शान सिर्फ दिल्लीवासियों ही नहीं, बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी खूब भाती है।
इस वजह से खास है यह रबड़ी फालूदा
चांदनी चौक में बीते 50 साल से रबड़ी फालूदा बेच रहे व्यापारी राकेश बताते हैं कि इसे तैयार करने में काफी मेहनत लगती है। दूध को कई घंटों तक पकाया जाता है और जब गाढ़ी रबड़ी बनकर तैयार होती है, तो उसे और मलाईदार बनाया जाता है। मोटी और मलाईदार रबड़ी तैयार होने के बाद इसके ऊपर फालूदा डाला जाता है और दोनों मिलकर स्वाद को कई गुना बढ़ा देते हैं।
स्वाद के साथ-साथ सेहत का ख्याल रखते हुए इसमें ड्राई फ्रूट्स भी मिलाए जाते हैं, जिनमें खास तौर पर काजू, पिस्ता और बादाम शामिल होते हैं। इसके बाद इसे बर्फ में ठंडा होने के लिए रखा जाता है और फिर ग्राहकों को कुल्हड़ में परोसा जाता है। राकेश के मुताबिक, कुल्हड़ में परोसे जाने की वजह से इसका जायका और भी निखर जाता है।
सिर्फ इतने रुपये में मिलता है स्वाद
यहां पिछले 15 साल से रबड़ी फालूदा बेच रहे एक और व्यापारी राहुल कुमार कहते हैं कि जैसा रबड़ी फालूदा दिल्ली में मिलता है, वैसा देश के किसी भी कोने में नहीं मिलता। यह पुरानी दिल्ली की शान और यहां की ऐतिहासिक विरासत है। हर साल गर्मियां शुरू होते ही पुरानी दिल्ली में यह मिलना शुरू हो जाता है।
राहुल बताते हैं कि यहां हर दुकानदार इसे अपने अंदाज में तैयार करता है। कोई इसे ड्राई फ्रूट्स के साथ देता है तो कोई बिना ड्राई फ्रूट्स के। कोई इसमें गुलाब का शरबत इस्तेमाल करता है तो कोई अलग-अलग फलों के शरबत से इसे तैयार करता है। यही वजह है कि कहीं इसकी कीमत 30 रुपये है, तो कहीं 40 रुपये और कोई इसे 60 रुपये तक बेच रहा है। यानी जिसकी जितनी मेहनत और क्वालिटी, उसी हिसाब से इसकी कीमत तय होती है।
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