क्या आपके मन में भी हर वक्त नकारात्मक विचार उमड़ते रहते हैं या कोई डरावनी बात आपको परेशान किए रहती है? अगर हां, तो इससे निजात पाने का एक बेहद सरल रास्ता मौजूद है। इसके लिए आपको सीधे अपने दिमाग की प्रोग्रामिंग पर काम करना होगा। बस एक छोटा-सा अभ्यास लगातार 15 दिनों तक करना है, जो आपको इन नकारात्मक विचारों से छुटकारा दिला सकता है।
क्यों पीछा नहीं छोड़ते नकारात्मक विचार
जब कभी हमारे साथ कोई हादसा या कड़वा अनुभव घटित होता है, तो वह हमारे अवचेतन मन में इस गहराई तक उतर जाता है कि उसे भुला पाना लगभग असंभव हो जाता है। कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि हमें सपने भी उसी तरह के दिखाई देने लगते हैं। मन में जमा बैठा डर लगातार डराता रहता है और नकारात्मक विचार जिंदगी की रफ्तार पर ब्रेक की तरह काम करते हैं। हम चाहकर भी उससे बाहर नहीं निकल पाते।
कुछ लोगों में अपने व्यक्तित्व को लेकर हीन भावना घर कर जाती है, जो उनके आत्मविश्वास को तोड़ देती है। ऐसे लोगों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा नहीं रह जाता। उनके नकारात्मक विचार हर काम में बाधा बनते हैं और वे उस तरह से प्रदर्शन नहीं कर पाते, जितनी उनमें असल में क्षमता होती है। तो आखिर इन नकारात्मक विचारों पर काबू कैसे पाएं या इन्हें पूरी तरह कैसे खत्म करें?
दिमाग वर्तमान में करता है काम
डॉ. मैक्सवेल माल्ट्ज़ की किताब 'द न्यू साइको साइबरनेटिक्स: द साइंस ऑफ सेल्फ इंप्रूवमेंट' में बताया गया है कि हमारा दिमाग वर्तमान समय में काम करता है। अगर आप अपने दिमाग को कोई तर्कसंगत कारण या सोच दे देते हैं, तो वह मन के पुराने डर और कड़वे अनुभवों को मिटाने में मदद करता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे आप अपने पुराने डर या तकलीफदेह अनुभवों की जड़ तक खुदाई कर रहे हों।
कैसे करें यह अभ्यास
इसका सबसे आसान तरीका यह है कि आपके मन में जो डर बैठा है, उसे एक सफेद कागज पर साफ-साफ लिख लें। इसके बाद ईमानदारी से सोचें कि यह वास्तव में डर है या किसी की कही-सुनी हुई बात भर है। इसमें आपकी कितनी गलती थी और अगर किसी और से गलती हुई तो उसकी वजह क्या रही?
कई बार हम दूसरों के व्यवहार और गलतियों के कारण भयभीत रहते हैं, या फिर उन्हें माफ नहीं कर पाते और मन में बदले की भावना पाले रखते हैं। जब आप उन्हें माफ कर देते हैं या अपने डर का तर्कसंगत कारण अपने दिमाग को समझा देते हैं और यह प्रमाण दे देते हैं कि जो डर या पुरानी सोच थी वह गलत थी, तो आपका वर्तमान दिमाग इसे स्वीकार कर लेता है और पुराने ख्यालों को मिटाने लगता है। इस तरह आपका दिमाग एक नई अवधारणा के साथ अपडेट हो जाता है और डरावनी बातों व नकारात्मक विचारों को दूर कर देता है।
सेल्समैन की दिलचस्प कहानी
डॉ. मैक्सवेल माल्ट्ज़ ने अपनी इस किताब में एक सेल्समैन का उदाहरण दिया है। वह हमेशा नकारात्मक विचारों से घिरा रहता था। उसे लगता था कि दुनिया की सबसे बुरी चीजें और घटनाएं सिर्फ उसी के साथ घटती हैं। उसके मन में अपने चेहरे को लेकर भी हीन भावना थी और वह चाहता था कि प्लास्टिक सर्जरी के जरिए उसका चेहरा ठीक कर दिया जाए।
एक दिन वह प्लास्टिक सर्जरी के लिए डॉक्टर के पास पहुंचा। सर्जरी के लिए दिन और समय तय कर दिया गया। जब वह सेल्समैन तय दिन डॉक्टर के पास आया, तो डॉक्टर ने उससे कहा कि पहले 15 दिन का एक अभ्यास करना होगा, तभी प्लास्टिक सर्जरी संभव हो पाएगी। डॉक्टर ने समझाया कि जब भी उसके दिमाग में कोई हीन भावना या नकारात्मक विचार आए, तो उसे 'कैंसिल' कह देना है। यह ठीक वैसा ही है, जैसे फोन में कोई ऐसा मैसेज आ जाए जो आपको पसंद न हो और आप उसे डिलीट कर देते हैं। यह अभ्यास उसे 15 दिनों तक करना था।
15 दिनों में दिखा बदलाव
उस सेल्समैन ने ठीक वैसा ही किया। 15 दिनों तक जब भी उसके मन में कोई नकारात्मक विचार आता, वह उसे 'कैंसिल' कह देता। इससे नकारात्मक बातें उसके दिमाग में पनपने से पहले ही खत्म होने लगीं। 15वें दिन जब वह डॉक्टर के पास पहुंचा, तो उसे प्लास्टिक सर्जरी कराने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई। वह अपने काम में पहले से कहीं बेहतर प्रदर्शन करने लगा था, क्योंकि उसके दिमाग ने नकारात्मक विचारों को स्वीकार करना ही बंद कर दिया था।
अगर आपके मन में भी हमेशा नकारात्मक विचार आते रहते हैं, तो आप इस उपाय को आजमाकर देख सकते हैं। इससे आपको अपने भीतर सकारात्मक बदलाव महसूस हो सकते हैं।
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