80 साल के बुजुर्ग को 'एक दिन कोर्ट में खड़े रहो' की अनोखी सजा, 27 साल बाद खत्म हुआ मुकदमा

बागपत की अदालत ने 27 साल पुराने मामले में 80 वर्षीय राजेंद्र सिंह को बरी करते हुए प्रतीकात्मक रूप से 24 घंटे कोर्ट में खड़े रहने और 1000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। बुजुर्ग ने मुकदमा खत्म होने पर अदालत का आभार जताया।

बागपत की अदालत का अनोखा फैसला

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 80 साल के बुजुर्ग को तीन साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि बाद में अदालत ने उन्हें बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया। 80 वर्षीय राजेंद्र सिंह को रिहा करते हुए कोर्ट ने प्रतीकात्मक तौर पर 24 घंटे कोर्ट परिसर में खड़े रहने की सजा दी और इसके साथ ही 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

यह मुकदमा बागपत की एक अदालत में करीब 27 साल तक चलता रहा और इस दौरान 100 से अधिक बार सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश (सीजेएम) मनिंद्रपाल सिंह ने यह आदेश तब दिया, जब अस्सी वर्षीय व्यक्ति ने अपने ऊपर लगे आरोप को स्वीकार कर लिया और अपनी बढ़ती उम्र तथा कमजोर सेहत का हवाला देते हुए नरमी बरतने की अपील की।

क्या है 1999 का पूरा मामला

दरअसल, यह मामला 26 जून, 1999 का है। उस समय सरूरपुर कलां गांव के धारा सिंह ने अपने ही गांव के राजेंद्र सिंह तथा दो अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक धमकी का मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि विवाद के दौरान राजेंद्र सिंह ने उसे गाली दी और जान से मारने की धमकी दी थी।

जांच पूरी होने और आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बाद राजेंद्र सिंह के मामले का रिकॉर्ड अन्य आरोपियों से अलग कर दिया गया, जिसके चलते उनका मुकदमा एक साल बाद शुरू हुआ।

गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति जब्ती का आदेश

करीब तीन दशकों तक राजेंद्र सिंह पूरी निष्ठा के साथ कई सुनवाइयों में हाजिर होते रहे। हालांकि हाल ही में बीमारी के कारण जब वे अदालत में पेश नहीं हो सके, तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया और उनकी संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दे दिया गया।

फैसले पर क्या बोले राजेंद्र सिंह

सजा सुनाए जाने के बाद राजेंद्र सिंह ने अदालत के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ अब हर सुनवाई पर कोर्ट आना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा था।

मैं 80 वर्ष का हूं और कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा हूं। अदालत जाना और हर सुनवाई में उपस्थित होना हर गुजरते साल के साथ कठिन होता जा रहा था। इस मामले को आखिरकार खत्म करने के लिए मैं अदालत का आभारी हूं। यह मेरे और मेरे परिवार के लिए बहुत बड़ी राहत है।

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