हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव के विजेता प्रतिनिधियों को शपथ दिलाई जा रही है, लेकिन लाहौल-स्पीति और पांगी को लेकर सुक्खू सरकार के एक आदेश ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। यहां जिला परिषद और पंचायत समिति के नवनिर्वाचित सदस्य 18 अक्टूबर 2026 के बाद ही अपने पद का कार्यभार संभाल सकेंगे।
क्या कहती है नई अधिसूचना
पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव और नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न होने के बाद जारी एक नई अधिसूचना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। प्रदेश सरकार ने 6 जून को जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया कि लाहौल-स्पीति और पांगी में जिला परिषद और पंचायत समिति के नवनिर्वाचित सदस्य 18 अक्टूबर 2026 के बाद ही अपने पद का कार्यभार ग्रहण कर सकेंगे।
सरकार का तर्क है कि वर्तमान निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 18 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी है, इसलिए प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए वही सदस्य तब तक अपने पदों पर बने रहेंगे। इस फैसले के चलते नए जनप्रतिनिधियों को आगामी चार महीनों तक अपने कार्यालयों का कार्यभार संभालने की अनुमति नहीं होगी।
नवनिर्वाचित सदस्यों में नाराजगी
सरकार के इस निर्णय पर नए चुने गए सदस्यों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि पुराने सदस्यों का कार्यकाल अक्टूबर तक था, तो फिर मई महीने में चुनाव करवाने और उसके बाद शपथ ग्रहण कराने का क्या औचित्य रह जाता है। उनका कहना है कि जनता ने उन्हें जनादेश दिया है, लेकिन उन्हें काम करने का अधिकार नहीं दिया जा रहा।
नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्य सुरेश कुमार ने कहा कि इस मामले में सभी कानूनी और लोकतांत्रिक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है और जल्द ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
राजनीतिक रंग लेने लगा मामला
प्रदेश सरकार की अधिसूचना के बाद लाहौल-स्पीति में राजनीतिक बहस तेज हो गई है और यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप भी लेने लगा है। पूर्व मंत्री एवं लाहौल-स्पीति विकास मंच के अध्यक्ष डॉ. रामलाल मारकंडा ने भी सरकार के फैसले पर आश्चर्य जताते हुए इसे जनजातीय क्षेत्र के लोगों के साथ अन्याय करार दिया है।
चुनाव सम्पन्न होने और शपथ ग्रहण के बाद भी प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों से वंचित रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है।
मारकंडा ने प्रदेश सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
आगे क्या
फिलहाल एक ओर सरकार प्रशासनिक प्रक्रिया और कार्यकाल की दलील दे रही है, वहीं दूसरी ओर नवनिर्वाचित प्रतिनिधि इसे जनादेश और लोकतांत्रिक अधिकारों की अनदेखी बता रहे हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह मामला प्रशासनिक स्तर तक सीमित रहता है या फिर राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का रूप ले लेता है।
https://hindi.news18.com/news/himachal-pradesh/keylong-zila-parishad-and-bdc-member-oath-taking-ceremony-controversy-in-lahaul-spiti-and-pangi-local18-ws-l-10552703.html