हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री साधना ने अपने करियर में कई शानदार फिल्में और गीत दिए, जिनमें से कुछ आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं। ऐसा ही एक गीत है फिल्म 'वो कौन थी' का सुपरहिट गाना 'लग जा गले', जिसे आज भी लोग बेहद पसंद करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में यह धुन निर्देशक राज खोसला को बिल्कुल नहीं भायी थी।
एक ऐसा गीत जो समय के साथ और मशहूर हुआ
हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ गाने ऐसे हैं जो वक्त बीतने के साथ लोगों के दिलों में और गहराई से उतरते चले गए। मनोज कुमार और साधना की फिल्म 'वो कौन थी' का गीत 'लग जा गले' भी इन्हीं में से एक है। यह नगमा आज भी श्रोताओं के मन पर अपनी छाप छोड़े हुए है, मगर बहुत कम लोग जानते हैं कि एक दौर में खुद फिल्म के निर्देशक राज खोसला को यह धुन पसंद नहीं आई थी।
संगीतकार से जता दी थी नाराजगी
स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि राज खोसला ने संगीतकार मदन मोहन से कह दिया था कि उन्हें उनसे इस तरह के काम की उम्मीद नहीं थी। हालांकि बाद में अभिनेता मनोज कुमार के चलते यह गीत फिल्म में शामिल हो सका और आगे चलकर यादगार बन गया।
राज खोसला की पुण्यतिथि पर ताजा हुआ किस्सा
9 जून को राज खोसला की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ा यह रोचक प्रसंग एक बार फिर चर्चा में है। राज खोसला हिंदी सिनेमा के उन गिने-चुने निर्देशकों में शामिल माने जाते हैं, जिन्होंने रहस्य, रोमांस और सस्पेंस से भरी कई यादगार फिल्में बनाईं। उनकी फिल्मों की पहचान दमदार कहानी और दर्शकों को आखिर तक बांधे रखने वाली प्रस्तुति रही।
31 मई 1925 को पंजाब में जन्मे राज खोसला ने अपने करियर में कई कामयाब फिल्मों का निर्देशन किया। अभिनेत्री साधना के साथ उनकी जोड़ी को खूब सराहा गया। 'वो कौन थी', 'मेरा साया' और 'अनीता' जैसी फिल्में आज भी बेहतरीन सस्पेंस थ्रिलर मानी जाती हैं।
1964 में रिलीज हुई थी 'वो कौन थी'
साल 1964 में आई फिल्म 'वो कौन थी' में साधना और मनोज कुमार मुख्य भूमिकाओं में थे। इसका संगीत प्रसिद्ध संगीतकार मदन मोहन ने तैयार किया था। इसी फिल्म का हिस्सा था गीत 'लग जा गले', जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी।
मदन मोहन के बेटे ने सुनाया किस्सा
मदन मोहन के बेटे समीर कोहली ने एक इंटरव्यू में इस गाने से जुड़ी रोचक बात साझा की थी। उनके अनुसार, जब मदन मोहन ने पहली बार 'लग जा गले' की धुन तैयार करके राज खोसला को सुनाई, तो निर्देशक तनिक भी प्रभावित नहीं हुए। उन्होंने साफ कह दिया कि उन्हें इस तरह की धुन की उम्मीद नहीं थी और यह फिल्म के अनुरूप नहीं लग रही।
मनोज कुमार ने पलट दी पूरी कहानी
मदन मोहन को अपनी रचना पर पूरा यकीन था। उन्हें भरोसा था कि यह धुन लोगों के दिलों तक जरूर पहुंचेगी। बाद में मनोज कुमार ने निर्देशक को एक बार फिर यह गाना सुनने के लिए मना लिया। जब दूसरी बार यह धुन बजी, तो माहौल ही बदल गया। इस बार राज खोसला ने गीत की खूबसूरती और उसकी भावनात्मक गहराई को महसूस किया और धुन खत्म होते ही उन्हें अपनी पहली राय पर अफसोस हुआ।
बाद में मनोज कुमार ने गर्व के साथ बताया था कि इस गीत को फिल्म में बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका रही। समय ने भी साबित कर दिया कि उनका फैसला बिल्कुल सही था। आज भी 'लग जा गले' भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में गिना जाता है और लोगों के मन में बसा हुआ है।
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