एक्सप्लेनर: पश्चिम बंगाल की राजनीति में क्यों मचा है बवाल; क्या दोहराया जाने वाला है 'खेला'?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस लगातार संकट से जूझ रही है। अब उसके 28 में से 20 सांसदों ने बगावत कर एनडीए के साथ जाने का फैसला कर लिया है।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सियासत इस वक्त एक ऐसे चौराहे पर आ खड़ी हुई है, जहां से आगे का रास्ता क्या होगा, इसका अंदाजा फिलहाल किसी को नहीं है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से पार्टी के लिए एक के बाद एक मुश्किलें सामने आ रही हैं और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

हार के बाद शुरू हुआ मुसीबतों का दौर

राज्य में जब से तृणमूल कांग्रेस विधानसभा चुनाव हारी है, तब से पार्टी के बुरे दिनों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सबसे पहले अभिषेक बनर्जी पर सड़क पर हमला हुआ, जिसने पार्टी के भीतर हलचल पैदा कर दी।

विधायकों की नाराजगी और बढ़ता असंतोष

इसके बाद विधायकों के स्तर पर असंतोष खुलकर सामने आ गया। ममता बनर्जी के बुलावे के बावजूद विधायकों के न पहुंचने से पार्टी के भीतर हंगामा मच गया और अंदरूनी दरारें साफ नजर आने लगीं।

अब सांसदों की बगावत

ताजा झटका तब लगा, जब पार्टी के दो तिहाई से ज्यादा सांसदों ने भी बगावत का रास्ता अपना लिया। तृणमूल कांग्रेस के 28 में से 20 सांसदों ने पार्टी से अपनी राह अलग कर ली है। इन बागी सांसदों ने काकोली घोष के नेतृत्व में एनडीए के साथ जाने का फैसला किया है, जिससे राज्य की राजनीति में नया भूचाल आ गया है।

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