कुछ दृश्य ऐसे होते हैं जिन्हें बयां करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं और जो सीधे दिल को छू जाते हैं। राष्ट्रपति भवन का भव्य दरबार हॉल सोमवार को एक ऐसे ही बेहद मार्मिक और भावुक क्षण का साक्षी बना, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भिगो दीं।
मंच पर पहुंचते ही टूट गया धैर्य
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों का सामना करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर की मां जब अपने बेटे का मरणोपरांत कीर्ति चक्र ग्रहण करने मंच पर पहुंचीं, तो देश के सर्वोच्च सम्मान का गौरव और संतान को खोने की असहनीय पीड़ा एक साथ उनके चेहरे पर झलक उठी।
हाथ में कीर्ति चक्र थामे जैसे ही उनकी नजर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर पड़ी, उनके सब्र का बांध टूट गया। वे फूट-फूटकर रोने लगीं और उन्होंने राष्ट्रपति के कंधे पर अपना सिर टिका दिया।
राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल भुलाकर बंधाया ढांढस
देश की प्रथम नागरिक ने भी सारी औपचारिकताओं को किनारे रखते हुए एक मां की इस अथाह वेदना को अपने सीने से लगा लिया। राष्ट्रपति मुर्मू ने बेहद आत्मीयता के साथ शहीद की मां को गले लगाया, उनके आंसू पोंछे और उन्हें सांत्वना दी।
पूरे देश को रुला गया मां का दर्द
यह महज एक रक्षा अलंकरण समारोह का हिस्सा भर नहीं था, बल्कि यह समूचे देश की ओर से उस मां के प्रति आभार और संवेदना जताने का सबसे विहंगम पल बन गया, जिसने भारत माता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। कुलगाम में दो आतंकियों को मार गिराकर सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस सपूत के शौर्य और उसकी मां के आंसुओं ने पूरे देश की आंखें नम कर दीं।
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