जयपुर में हाल ही में हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि घरों को तोड़ने जैसी कार्रवाई के लिए इंटरनेट सेवाओं को बंद करना किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता। डोटासरा ने सरकार से पारदर्शिता और संवाद के साथ काम करने की अपील की।
इंटरनेट बंदी पर भाजपा पर दोहरे मापदंड का आरोप
डोटासरा ने कहा कि जब प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान इंटरनेट बंद किया जाता था, तब भाजपा लगातार इसका विरोध जताती थी। लेकिन अब वही भाजपा सरकार ध्वस्तीकरण कार्रवाई के दौरान इंटरनेट बंद कर रही है, जो उसके दोहरे रवैये को उजागर करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंटरनेट बंद होने से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है और इससे सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े होते हैं।
संवाद से टाली जा सकती थी स्थिति
कांग्रेस नेता का कहना है कि अगर सरकार प्रभावित लोगों और स्थानीय निवासियों से पहले ही संवाद करती और उन्हें विश्वास में लेकर कदम उठाती, तो इंटरनेट बंद करने जैसी नौबत आती ही नहीं। उनके मुताबिक प्रशासन और जनता के बीच बेहतर तालमेल होने पर विवाद की स्थिति को काफी हद तक रोका जा सकता था।
डोटासरा ने कहा कि सरकार को ध्वस्तीकरण अभियान शुरू करने से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पूरी तस्वीर साफ करनी चाहिए थी। जनता को बताया जाना चाहिए था कि यह कार्रवाई किस वजह से की जा रही है, इसका कानूनी आधार क्या है और प्रभावित परिवारों के लिए सरकार की क्या योजना है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता की कमी से लोगों में भ्रम और नाराजगी पनपती है।
प्रभावित परिवारों की जिम्मेदारी भी सरकार पर
डोटासरा ने कहा कि जिन लोगों के घर या संपत्तियां इस कार्रवाई की चपेट में आई हैं, उनके पुनर्वास और सहायता की जिम्मेदारी भी सरकार के कंधों पर है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रभावित परिवारों को कौन-सी राहत और मदद उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि केवल बुलडोजर चलाना किसी समस्या का हल नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों के भविष्य की चिंता करना भी सरकार का दायित्व है।
प्रशासनिक कार्रवाई में संवेदनशीलता जरूरी
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि इंटरनेट बंद कर बुलडोजर चलाना समाज में अच्छा संदेश नहीं देता। किसी भी प्रशासनिक कदम में पारदर्शिता, संवाद और संवेदनशीलता बेहद आवश्यक है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों के दौरान जनता को विश्वास में लेकर ही फैसले लिए जाएं, ताकि लोगों का भरोसा कायम रहे और अनावश्यक विवादों से बचा जा सके।
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