मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र से प्रशासनिक लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां सरकारी दफ्तर ने एक जीवित बुज़ुर्ग महिला को कागज़ों में मृत घोषित कर दिया है। इसी वजह से बीते कई महीनों से उन्हें मिलने वाली पेंशन रोक दी गई है। खुद को ज़िंदा साबित करने के लिए महिला लगातार कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं। अब यह प्रकरण मानवाधिकार आयोग तक पहुंच चुका है, जहां उचित कार्रवाई की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मुजफ्फरपुर ज़िले के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत संजय सिनेमा रोड की निवासी 75 वर्षीय विधवा पवितर देवी को अब अपने जीवित होने का प्रमाण देना पड़ रहा है। दरअसल, रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया है। इसी कारण हर महीने मिलने वाली उनकी पेंशन की राशि भी रोक दी गई है, जिससे वे बेहद परेशान हैं।
लगातार लगा रही हैं कार्यालय के चक्कर
पवितर देवी दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते थक चुकी हैं। उन्होंने बताया कि कार्यालयों ने उन्हें मृत मान लिया है और बीते तीन-चार महीने से उनकी पेंशन नहीं आ रही है। हालत यह है कि लोग उन्हें 'ज़िंदा भूत' तक कहने लगे हैं।
आखिरकार हारकर महिला ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा के ज़रिए मानवाधिकार आयोग में दो याचिकाएं दाखिल की हैं। याचिका में पीड़िता ने कहा है कि वे ज़िंदा हैं, फिर भी प्रताड़ना झेल रही हैं, लोग उन्हें भूत कहने लगे हैं और महीनों से उन्हें पेंशन नहीं मिल पा रही है।
अधिवक्ता ने बताया मानवाधिकार का उल्लंघन
इस मामले को लेकर मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा ने कहा कि यह प्रकरण बेहद हास्यास्पद है। किसी जीवित महिला को मृत बताकर उसकी वृद्धा पेंशन की राशि रोक देना मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने आगे बताया कि इस मामले की जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग, पटना को दी गई है तथा उचित कार्रवाई का अनुरोध किया गया है, ताकि पीड़िता को जल्द से जल्द उसकी राशि उपलब्ध कराई जा सके।
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