‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने लिया अनिमेष कुजूर का नाम, गर्व से भर उठा छत्तीसगढ़ का परिवार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 134वें संस्करण में छत्तीसगढ़ के एथलीट अनिमेष कुजूर का जिक्र किया और उनसे संवाद किया, जिससे अंबिकापुर में बैठा उनका परिवार खुशी और भावुकता से भर उठा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 134वें संस्करण में छत्तीसगढ़ के एक होनहार एथलीट का नाम गूंजा। इस दौरान पीएम मोदी ने अनिमेष कुजूर का नाम लेकर उनसे वन टू वन चर्चा की। अपने बेटे को प्रधानमंत्री से बात करते देख रहे माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए और पूरा परिवार भावुक होकर गर्व से भर उठा।

कौन हैं अनिमेष कुजूर

अनिमेष कुजूर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के जशपुर इलाके के रहने वाले एथलीट खिलाड़ी हैं, जिन्होंने देश और विदेश दोनों जगह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उनके पिता अंबिकापुर में पुलिस विभाग में डीएसपी के पद पर पदस्थ हैं। हाल के दिनों में अनिमेष ने देश के लिए कई गोल्ड मेडल जीते हैं और भारत के सबसे तेज धावक के रूप में वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है।

प्रधानमंत्री के उल्लेख से परिवार में खुशी की लहर

डीएसपी अमृत कुजूर ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनके बेटे का नाम लेकर उसकी उपलब्धियों की चर्चा करना परिवार के लिए बेहद गर्व का क्षण था। उन्होंने बताया कि पूरा परिवार कार्यक्रम को लाइव देख रहा था और जैसे ही प्रधानमंत्री ने बेटे से बातचीत की, परिवार के सभी सदस्य खुशी से झूम उठे।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बेटे ने स्वयं फोन कर पूछा कि क्या उन्होंने कार्यक्रम देखा, जिस पर परिवार ने बताया कि वे पूरी बातचीत लाइव देख रहे थे।

गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ सफर

अमृत कुजूर ने बताया कि उनका बेटा मूल रूप से जशपुर जिले की कमतरा पंचायत के ग्राम घुईटांगर का निवासी है। बचपन में वह गांव के दूसरे बच्चों के साथ नंगे पैर दौड़ा करता था। उस समय परिवार उसकी प्रतिभा को पूरी तरह पहचान नहीं पाया था।

सैनिक स्कूल से मिली खेल प्रतिभा को दिशा

अनिमेष ने छठी से बारहवीं कक्षा तक सैनिक स्कूल अंबिकापुर में पढ़ाई की। इसी दौरान वह क्रॉस कंट्री और अन्य एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगे। स्कूल स्तर पर मिले अवसरों ने उनकी खेल प्रतिभा को नई दिशा दी और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया।

कोरोना काल में मिली बड़ी पहचान

कोरोना काल के दौरान अमृत कुजूर की पोस्टिंग कांकेर में थी। वहीं खेल एवं युवा कल्याण विभाग की प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर इस युवा खिलाड़ी ने पांच स्वर्ण पदक जीते। इसके बाद रायपुर में आयोजित वेस्ट जोन प्रतियोगिता में 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर उसका चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ।

राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

नेशनल प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल करने के बाद परिवार को उसकी असली क्षमता का अंदाजा हुआ। इसके बाद उसे बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए गए। वर्तमान में वह एशियन स्तर की प्रतियोगिताओं और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीत चुका है और राष्ट्रीय स्तर पर भी उसके नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चयन

हाल ही में रांची में आयोजित 29वीं सीनियर फेडरेशन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन के आधार पर अनिमेष का चयन कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए हुआ है। इस उपलब्धि को उसके खेल करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

बेटे की सफलता पर गर्व, ओलंपिक से उम्मीदें

अमृत कुजूर ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि एक दिन उनके बेटे का नाम प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में लिया जाएगा। हालांकि पिछले तीन-चार वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके लगातार प्रदर्शन को देखकर उन्हें विश्वास था कि वह एक दिन देश का नाम रोशन करेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनका बेटा वर्ष 2028 के ओलंपिक में हिस्सा लेकर भारत के लिए पदक जीतेगा।

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