उत्तर प्रदेश के आगरा को पेठा नगरी के नाम से जाना जाता है। यहां का पेठा पूरी दुनिया में अपनी पहचान रखता है। इसकी शुरुआत मुगलकाल से मानी जाती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह पेठा आखिर बनता कैसे है। असल में पेठा सफेद कद्दू से तैयार किया जाता है, जिसकी बड़े पैमाने पर खेती होती है।
पेठा बनाने के काम आने वाला सफेद कद्दू और घरों में सब्जी, रायता तथा दूसरे पकवानों में इस्तेमाल होने वाला सामान्य कद्दू—दोनों ही एक जैसे तरीके से उगाए जाते हैं। इनकी बड़ी-बड़ी बेलें होती हैं जिन्हें खेतों में फैलाया जाता है। आगरा के कई इलाकों में कद्दू की फसल ली जाती है।
एक बेल पर लगते हैं कई कद्दू
बुआई के 50 से 60 दिन बाद कद्दू निकलना शुरू हो जाता है और एक ही बेल पर कई कद्दू पैदा होते हैं, जिससे किसानों को बंपर लाभ मिलता है। आगरा के अलावा यह कद्दू कई जिलों और राज्यों में भेजा जाता है, इसी वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। यह सस्ती खेती है, जो किसानों को तगड़ा मुनाफा भी देती है।
इस तरह होती है कद्दू की खेती
आगरा में कद्दू की खेती करने वाले किसान तुलाराम ने बताया कि बीज बुआई के करीब 50 दिनों बाद कद्दू पैदा होना शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि वह किसी प्रकार का कीटनाशक या केमिकल इस्तेमाल नहीं करते। जैविक खेती और खाद का उपयोग किया जाता है, जिससे कद्दू काफी बड़ा और अच्छा पैदा होता है। उनके अनुसार डीएपी खाद इस फसल के लिए रामबाण साबित होती है और इसके इस्तेमाल से फसल काफी अच्छी होती है।
तुलाराम ने बताया कि आगरा में ही कद्दू की खपत बहुत ज्यादा है। पेठा बनाने के लिए व्यापारी भारी मात्रा में कद्दू खरीदते हैं, इसके अलावा घरों में भी इसका उपयोग होता है। कम लागत की इस खेती से उन्हें अच्छा मुनाफा मिल जाता है। किसान का कहना है कि इस फसल का लाभकारी मूल्य उन्हें आसानी से प्राप्त हो जाता है।
एक साथ बोएं दो बीज
किसान तुलाराम ने बताया कि तकनीक और अनुभव के साथ कद्दू की खेती बेहतर तरीके से की जा सकती है। बीज बोते समय एक जगह एक साथ दो या तीन बीज ही डालने चाहिए, जिससे बेल की ग्रोथ मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि कई बार किसान तीन से अधिक बीज बो देते हैं, जिससे बेल कमजोर हो जाती है और कद्दू बड़ा होने से पहले ही टूटकर गिर सकता है।
पानी और खाद का रखें खास ध्यान
तुलाराम के अनुसार पानी और खाद का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। गर्मियों में अगर पानी देने में लापरवाही हुई तो बेल सूखकर खराब हो सकती है, जिससे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि जरूरत से ज्यादा पानी भी नहीं देना चाहिए, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि अगर मिट्टी बहुत सूख रही हो तो धूप के कारण बेल जल सकती है। इसलिए नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर थोड़ा-थोड़ा पानी देते रहना चाहिए।
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