विपक्षी इंडिया गठबंधन की एक अहम बैठक सोमवार को दिल्ली में आयोजित हुई। लेकिन इस बैठक से तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के दूर रहने ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि हाल ही में कांग्रेस के समर्थन से राज्य में सरकार बनाने वाली TVK को लेकर इंडिया गठबंधन में शामिल होने की अटकलें तेज थीं। इसके बावजूद पार्टी ने इस बैठक में हिस्सा न लेने का फैसला किया।
दूसरी ओर, डीएमके के बैठक से दूरी बनाने के पीछे की वजह राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर समझी जा सकती है, मगर TVK की अनुपस्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर कांग्रेस के साथ राजनीतिक तालमेल होने के बाद भी अभिनेता विजय की पार्टी ने विपक्षी मंच से किनारा क्यों कर लिया?
संसद में प्रतिनिधित्व नहीं होना बनी बड़ी वजह
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो इसकी सबसे प्रमुख वजह यह है कि संसद में TVK का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। पार्टी के पास न तो लोकसभा में कोई सांसद है और न ही राज्यसभा में कोई सदस्य। इंडिया गठबंधन की बैठकों में आम तौर पर उन्हीं दलों को तरजीह मिलती है जिनकी राष्ट्रीय राजनीति में पकड़ और संसद में सक्रिय भूमिका होती है। ऐसे में TVK का इस बैठक में न आना स्वाभाविक माना जा रहा है।
कांग्रेस और TVK के बीच मजबूत रिश्ते
हालांकि TVK और कांग्रेस के संबंध मजबूत बने हुए हैं। हाल ही में पार्टी ने अपने हिस्से की इकलौती राज्यसभा सीट भी कांग्रेस को सौंपकर गठबंधन धर्म निभाने का संकेत दिया था। इसके बाद भी TVK ने अब तक औपचारिक तौर पर इंडिया गठबंधन की सदस्यता नहीं ली है। फिलहाल कांग्रेस और TVK के बीच का राजनीतिक समझौता तमिलनाडु तक ही सीमित माना जा रहा है और इसे राष्ट्रीय स्तर के विपक्षी गठबंधन से जोड़कर नहीं देखा जा रहा।
बैठक का मकसद विपक्षी समन्वय को मजबूत करना
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 8 जून को होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद के भीतर और बाहर विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल कायम करना है। बैठक में केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार के खिलाफ रणनीति, संसद के आगामी सत्र की तैयारी और विपक्षी एकता को और मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। यही वजह है कि उन दलों की भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है जिनकी संसद में उपस्थिति है और जो राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति का हिस्सा हैं।
बैठक में शामिल प्रमुख विपक्षी नेता
इस बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव तथा राजद नेता तेजस्वी यादव सहित कई बड़े विपक्षी चेहरे शिरकत कर रहे हैं। इनके अलावा वाम दलों और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
क्षेत्रीय पहचान बनाए रखना चाहती है पार्टी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TVK फिलहाल खुद को एक क्षेत्रीय ताकत के रूप में स्थापित रखना चाहती है और राष्ट्रीय गठबंधन में शामिल होने को लेकर जल्दबाजी से बचना चाहती है। तमिलनाडु की सत्ता संभालने के बाद पार्टी की पहली प्राथमिकता राज्य के प्रशासन और संगठन को मजबूती देना है। ऐसे में बैठक से उसकी दूरी को राष्ट्रीय राजनीति से कटाव नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल इतना साफ है कि कांग्रेस के साथ सहयोग के बावजूद TVK ने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन का हिस्सा बनने को लेकर अपने पत्ते अब तक पूरी तरह नहीं खोले हैं। यही कारण है कि दिल्ली की इस महत्वपूर्ण बैठक से विजय की पार्टी की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है।
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