तिब्बत की धरती में चीन को मिला दुर्लभ क्वार्ट्ज भंडार, सोलर एनर्जी और चिप उद्योग में अमेरिका से छिनेगी बढ़त

चीन ने तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन में 99.995 प्रतिशत से अधिक शुद्धता वाले हाई-प्योरिटी क्वार्ट्ज का भंडार खोज निकाला है, जो सौर पैनल और सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए बेहद अहम है और अमेरिका पर उसकी निर्भरता घटा सकता है।

दुनिया में सैकड़ों देश हैं, लेकिन सभी एक जैसी मजबूत अर्थव्यवस्था क्यों नहीं खड़ी कर पाते? इसकी वजह सिर्फ सरकारें, व्यवस्था या भ्रष्टाचार नहीं होतीं, बल्कि बड़ी हद तक किसी देश की किस्मत उसकी जमीन के नीचे छिपे संसाधन तय करते हैं। जिन देशों की धरती में बहुमूल्य खनिज दबे होते हैं, वे आर्थिक रूप से समृद्ध बनते जाते हैं। इस लिहाज से चीन बेहद भाग्यशाली देश माना जाता है, जिसकी जमीन कीमती खनिजों से भरी पड़ी है।

इसी कड़ी में चीन को एक और बड़ी कामयाबी मिली है, जो उसे तकनीक और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अमेरिका के सामने डटकर खड़े होने का अवसर देगी। चीन ने तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन में हाई प्योरिटी क्वार्ट्ज का भंडार खोज निकाला है। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यही वह खनिज है जो इस क्षेत्र में चीन की अमेरिका पर निर्भरता खत्म कर सकता है।

अमेरिका पर निर्भरता घटने की उम्मीद

उच्च शुद्धता वाला क्वार्ट्ज सौर पैनल, सेमीकंडक्टर चिप और दूसरे हाई-टेक उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला बेहद अहम खनिज है। अब तक चीन अपनी जरूरत का अधिकांश हाई-प्योरिटी क्वार्ट्ज विदेशों से, और खास तौर पर अमेरिका से आयात करता रहा है। इस खोज के बाद हालात बदल सकते हैं और इन देशों पर उसकी निर्भरता काफी हद तक समाप्त हो सकती है।

चीन ने कैसे खोजा यह भंडार

अप्रैल में प्रकाशित एक शोध पत्र में बताया गया है कि तिब्बत के एक विशेष प्रकार के ग्रेनाइट में बेहद शुद्ध क्वार्ट्ज मौजूद है। वैज्ञानिकों ने पाया कि इससे 99.995 प्रतिशत से अधिक शुद्ध सिलिका वाला क्वार्ट्ज हासिल किया जा सकता है, जो उच्च तकनीक उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

फिलहाल दुनिया का सबसे बड़ा हाई-प्योरिटी क्वार्ट्ज स्रोत अमेरिका के स्प्रूस पाइन क्षेत्र में स्थित है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक आपूर्ति होती है। चीन इस खनिज का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक है। ऐसे में अपने ही देश में यह खनिज मिल जाना उसके लिए किसी खजाने से कम नहीं है।

इससे पहले चीन ने 2020 में हेनान प्रांत और 2021 में शिनशियांग उइगुर ऑटोनॉमस रीजन में भी ऐसे भंडार खोजे थे। इसके बाद 2025 में चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने हाई-प्योरिटी क्वार्ट्ज को देश का 174वां रणनीतिक खनिज घोषित किया और पूरे देश में इसके नए स्रोतों की तलाश तेज करने का फैसला किया। इसी प्रयास का नतीजा है कि अब चीन के पास यह भंडार मौजूद है।

क्यों इतना अहम है उच्च शुद्धता वाला क्वार्ट्ज

हाई-प्योरिटी क्वार्ट्ज एक बेहद मूल्यवान खनिज है। यह गर्मी और जंग सहने की क्षमता, बेहतर इन्सुलेशन और कम तापीय विस्तार जैसे गुणों से लैस होता है। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑप्टिकल उपकरणों, कंप्यूटर चिप्स और सोलर पैनलों के निर्माण में किया जाता है। इसका उपयोग पॉलीसिलिकॉन बनाने में भी होता है, जो सौर पैनलों का प्रमुख कच्चा माल है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया में हाई-प्योरिटी क्वार्ट्ज के भंडार बहुत सीमित हैं और इनका वितरण भी असमान है, जिसके चलते वैश्विक सप्लाई चेन पर लगातार जोखिम बना रहता है। तिब्बत में मिले क्वार्ट्ज की शुद्धता 99.995% से अधिक बताई गई है। यह Grade II और उससे ऊपर की श्रेणी में आता है, जिसकी बाजार कीमत लगभग $8,000–12,000 प्रति टन तक हो सकती है।

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