पश्चिम एशिया में चीन की संदिग्ध भूमिका पर मुहर
पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच चीन की भूमिका पर शुरुआत से ही गंभीर सवाल उठ रहे थे। अब तक यह माना जा रहा था कि बीजिंग इस पूरे संघर्ष में केवल व्यापारिक और कूटनीतिक स्तर पर ही जुड़ा हुआ है, लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने चीन के खतरनाक रवैये की पोल खोल दी है। तेहरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही मिसाइलों में चीन निर्मित पुर्जों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे अरब जगत में खलबली मच गई है, वहीं वाशिंगटन और तेल अवीव के सुरक्षा रणनीतिकारों के लिए भी यह एक नई सिरदर्दी बन गया है।
क्षेत्रीय संघर्ष से आगे बढ़ा यमन सऊदी तनाव
सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से चला आ रहा संघर्ष अब महज एक स्थानीय या क्षेत्रीय सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रह गया है। हथियारों के अवैध प्रसार, वैश्विक भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और आधुनिक सैन्य तकनीकों के इस्तेमाल ने इसे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दे में बदल दिया है। चीन में बने मिसाइल पुर्जों का हूती विद्रोहियों के खरीद नेटवर्क तक पहुंचना बेहद संवेदनशील मामला है। इससे न केवल रियाद की सुरक्षा पर सीधा खतरा पैदा हुआ है, बल्कि हाल के वर्षों में सऊदी अरब और चीन के बीच प्रगाढ़ हुए संबंधों पर भी कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
बीजिंग का दोहरा रवैया और कूटनीतिक विरोधाभास
युगांडा स्थित मीडिया संस्थान पीएमएल डेली की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, चीन और सऊदी अरब के बीच गहरा आर्थिक गठजोड़ है। चीन सऊदी अरब से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। इतना ही नहीं, वर्ष 2023 में चीन ने ही मध्यस्थता करते हुए सऊदी अरब और ईरान के बीच ऐतिहासिक कूटनीतिक समझौता कराया था और दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में, यदि वही चीन अपने रक्षा उपकरणों और सैन्य कलपुर्जों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हूतियों तक पहुंचने दे रहा है, तो यह रियाद के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च की जांच में बड़ा खुलासा
रिपोर्ट में ब्रिटेन के स्वतंत्र हथियार निगरानी संगठन कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च की जांच का हवाला दिया गया है। जांच अधिकारियों ने पाया कि हूतियों द्वारा दागी गई मिसाइलों में इस्तेमाल किए गए कई महत्वपूर्ण पुर्जे चीनी आपूर्तिकर्ताओं से जुड़े हुए हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित सैन्य पुर्जे शामिल हैं:
- रॉकेट मोटर के विशेष हिस्से: मिसाइल को आवश्यक थ्रस्ट और गति प्रदान करने वाले कलपुर्जे।
- स्टेबिलिटी फिन: उड़ान के दौरान मिसाइल का संतुलन और सटीक दिशा बनाए रखने वाले उपकरण।
- एयरफ्रेम पुर्जे: मिसाइल की बाहरी संरचना और एयरोडायनामिक डिजाइन से जुड़े विशेष पुर्जे।
जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ये सभी सैन्य उपकरण हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले यमनी इलाकों की तरफ भेजी जा रही अवैध खेपों में बरामद हुए हैं। इससे पहले भी सऊदी अरब द्वारा चीनी मिसाइल प्रणालियों का इस्तेमाल किए जाने की खबरें सामने आई थीं, लेकिन अब विद्रोहियों के हाथों में भी चीनी सैन्य तकनीक की मौजूदगी ने मध्य पूर्व के सामरिक संतुलन को चिंताजनक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
https://hindi.news18.com/world/middle-east-chinese-missile-parts-traced-to-houthi-networks-sparking-security-concerns-in-saudi-arabia-iran-war-10972301.html