बस्तर में जवानों के संग पीएम नरेंद्र मोदी ने मनाई दीपोत्सव, बोले- 'दशकों बाद देश नक्सलवाद से हुआ पूरी तरह मुक्त'

छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के साथ दीपावली मनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवानों के त्याग और शौर्य की सराहना की तथा कहा कि देश दशकों पुरानी नक्सलवाद की जंग जीत चुका है।

बस्तर के जंगलों में जवानों संग दीपोत्सव का आयोजन

दीपावली के पावन अवसर पर जब पूरा देश अपने घरों में अपनों के साथ खुशियों का जश्न मना रहा है, तब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर राष्ट्र की सुरक्षा में डटे जवानों के बीच पहुंचकर दीपोत्सव की अपनी खास परंपरा निभाई। प्रधानमंत्री ने 8 नवंबर को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पहुंचकर सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीपोत्सव मनाया। इस दौरान उन्होंने देश के रक्षकों को संबोधित करते हुए एक भावुक संदेश दिया और उनके असीम त्याग तथा समर्पण को नमन किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब पूरा देश और दुनिया के कोने-कोने में बसे करोड़ों भारतीय इस रोशनी के पर्व को मना रहे हैं, लोग अपनों के पास लौटने के लिए दूर-दूर से यात्राएं कर रहे हैं, उस समय वह देश की सुरक्षा में तैनात वीरों के बीच आए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीमाओं पर चौकस पहरा देने वाले और देश के भीतर सुरक्षा की कमान संभालने वाले भारत माता के वीर बेटे और बेटियां ही उनका असली परिवार हैं।

'नक्सली आतंक का अंत और विकास का नया सवेरा'

बस्तर के जंगलों में जवानों के बीच पहुंचे प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह वही पावन भूमि है जो कभी नक्सली आतंक और माओवादी हिंसा के कहर से झुलसती थी। उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मियों की कड़ी मेहनत, त्याग और निरंतर तपस्या के कारण ही आज इस भूमि से नक्सली आतंक का नामोनिशान खत्म हो गया है। अब बस्तर में भय का माहौल समाप्त हो चुका है और चारों तरफ विकास की नई बहार शुरू हो गई है।

पीएम मोदी ने देश को इस नक्सली खौफ से आजादी दिलाने के लिए जवानों के प्रति दिल से आभार जताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 की यह दिवाली बेहद खास और ऐतिहासिक है। लगभग 40-50 साल के लंबे इंतजार के बाद देशवासियों के जीवन में ऐसी दीपावली आई है। यह पहली बार है जब भारत नक्सलवाद और माओवादी आतंक के खिलाफ लड़ी जा रही दशकों पुरानी लड़ाई में पूर्ण विजय प्राप्त कर चुका है।

देश का हर जिला नक्सलवाद के साए से मुक्त

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस मुकाम को एक असाधारण उपलब्धि करार दिया। उन्होंने कहा कि यह पहली ऐसी दिवाली है जब देश का एक-एक जिला नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो चुका है। देश के करोड़ों नागरिक नक्सलवाद के खौफ को परास्त कर चुके हैं। इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय उन्होंने देश के लाखों वीरों, जवानों, महिला फाइटर्स और सुरक्षा कर्मियों के बलिदान को दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह 140 करोड़ देशवासियों की ओर से जवानों की निस्वार्थ सेवा, त्याग और समर्पण भाव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने आए हैं। सुरक्षा बलों ने दिन-रात एक करके देशवासियों को शांति और सुरक्षा का माहौल प्रदान किया है।

आंतरिक सुरक्षा का महत्व और संस्कृत श्लोक का संदेश

सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने देश के दूरदर्शी पूर्वजों के एक विचारशील कथन का उल्लेख किया। उन्होंने संस्कृत के श्लोक 'अभ्यंतर भयं रक्षम्, असारंबाह्यतो भयं' का जिक्र करते हुए इसका अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि जब किसी राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तो कोई भी बाहरी दुश्मन देश को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता है।

उन्होंने आगे सचेत करते हुए कहा कि यदि किसी देश की आंतरिक सुरक्षा कमजोर पड़ जाए, तो बाहरी शत्रु भी सिर उठाने लगते हैं। इसी कारण जो ऐतिहासिक भूमिका सीमाओं पर देश की सेनाएं निभाती हैं, ठीक वही दायित्व देश के भीतर आंतरिक सुरक्षा में तैनात बल पूरा करते हैं। राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों ने अनगिनत बलिदान दिए हैं।

विभिन्न सुरक्षा बलों और बस्तर फाइटर्स को किया नमन

देश की आंतरिक सुरक्षा में जुटी विभिन्न एजेंसियों और बलों के योगदान को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने उनका आभार जताया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में लगे CRPF, कोबरा, BSF, ITBP, SSB, IRB का हर एक जवान, राज्य पुलिस के सिपाही, बस्तर फाइटर्स जैसी स्पेशल फोर्स के वीर जवान और महिला फाइटर्स की अमूल्य सेवाओं के लिए पूरा भारत हमेशा उनका ऋणी रहेगा।

भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के करोड़ों-करोड़ों नागरिक अपने इन जांबाज रक्षकों पर गर्व करते हैं। इसी अपनेपन और कृतज्ञता के भाव के साथ उन्होंने बस्तर में मौजूद जवानों के साथ-साथ देश की कठिन सीमाओं पर मुस्तैद सभी सैनिकों को दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं दीं।

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