रसोई गैस फिर महंगी: नुकसान में डूबीं तेल कंपनियां, LPG के दाम बढ़ाना बनी मजबूरी

एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की हालिया बढ़ोतरी को केंद्र सरकार ने वैश्विक हालात की मजबूरी बताया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के अनुसार पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती लागत के चलते तेल कंपनियों को हर सिलेंडर पर भारी नुकसान हो रहा था।

घरेलू रसोई गैस के दाम एक बार फिर बढ़ने से आम परिवारों का बजट प्रभावित हुआ है। एलपीजी सिलेंडर की कीमत में हाल ही में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद कई शहरों में सिलेंडर के दाम 940 रुपये के पार पहुंच गए हैं। केंद्र सरकार ने इस बढ़ोतरी को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की मजबूरी करार दिया है।

सरकार ने बढ़ोतरी को बताया अपरिहार्य

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा टाला नहीं जा सकता था। उन्होंने माना कि सरकार को भी इस फैसले का दुख है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती चुनौतियों और लागत के कारण यह कदम जरूरी हो गया था। मंत्री के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी संकट, ऊर्जा की चढ़ती कीमतें, महंगा ट्रांसपोर्टेशन, बढ़ा हुआ बीमा खर्च और बाधित आपूर्ति ने मिलकर एलपीजी की लागत में भारी इजाफा कर दिया।

तीन महीने में दूसरी बार बढ़े दाम

बढ़ती वैश्विक ऊर्जा लागत के चलते सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। पिछले तीन महीनों में यह दूसरा मौका है जब घरेलू एलपीजी महंगी हुई है। प्रह्लाद जोशी ने बताया कि इस समय दुनिया गंभीर संकटों से गुजर रही है, वैश्विक आपूर्ति प्रभावित है, ट्रांसशिपमेंट में दिक्कतें आ रही हैं और एलपीजी सीमित स्रोतों से ही उपलब्ध हो पा रही है, जिसके चलते कीमत बढ़ाना मजबूरी बन गई।

परिवहन और बीमा खर्च में इजाफा

मंत्री ने कहा, ‘एलपीजी के ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ गई है, गैस की मूल कीमत भी अधिक है और ट्रांसशिपमेंट में 40-45 दिन लगने के कारण बीमा खर्च भी बढ़ गया है। हम आम लोगों की चिंता को अच्छी तरह समझते हैं और हमें भी इसकी फिक्र है, लेकिन मौजूदा हालात में गैस की कीमत बढ़ाना मजबूरी बन गया है।’

हर सिलेंडर पर तेल कंपनियों को घाटा

एलपीजी सिलेंडर की यह बढ़ोतरी 7 मार्च को हुई 60 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि के बाद की गई है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन के दाम चढ़ गए। दाम बढ़ाने से पहले सरकारी तेल कंपनियों को हर घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर करीब 703 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसी बढ़ते वित्तीय दबाव को कम करने के लिए कीमतों में संशोधन किया गया।

ईरान-इजराइल तनाव से बढ़ा दबाव

केंद्र सरकार का कहना है कि हालिया बढ़ोतरी के बावजूद भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम दुनिया के कई देशों की तुलना में अब भी काफी कम हैं। सरकार के अनुसार 28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे एक घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति लागत बढ़कर 1,600 रुपये से अधिक हो गई है। बढ़ती लागत और वैश्विक कीमतों के दबाव के बीच सरकार तथा तेल कंपनियों पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ गया है।

सऊदी बेंचमार्क से जुड़ी हैं भारत की कीमतें

सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत में एलपीजी आयात की कीमतें सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi CP) से जुड़ी होती हैं, जिसे इस ईंधन का वैश्विक बेंचमार्क माना जाता है। पश्चिम एशिया संकट और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में आपूर्ति बाधित होने के कारण फरवरी से अब तक यह बेंचमार्क करीब 46% बढ़ चुका है, जिससे भारत की आयात लागत में भी भारी इजाफा हुआ है।

कर्नाटक सरकार पर निशाना

इसी दौरान केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और गुटबाजी से घिरी हुई है।

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