राहुल गांधी को करारा झटका, अखिलेश और केजरीवाल के नेताओं ने कांग्रेस के खिलाफ खोला मोर्चा

विपक्ष के भीतर मची रार ने राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जहाँ अब अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल की पार्टियों के नेता ही कांग्रेस की असफलता का कच्चा-चिट्ठा खोल रहे हैं। इस खींचतान ने अप्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए राजनीतिक लाभ की स्थिति बना दी है।

विपक्ष के भीतर छिड़ी जंग और राहुल गांधी की मुश्किलें

राजनीतिक गलियारों में इस समय एक अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिल रही है। एक ओर राहुल गांधी लगातार यह दावा कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे घबरा गए हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष के खेमे में ही ऐसे नेताओं की फौज खड़ी हो गई है जो डंके की चोट पर राहुल गांधी की विफलताओं का रिपोर्ट कार्ड पेश कर रहे हैं। जिस तरह से अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल की पार्टियों के नेता खुलकर राहुल गांधी के खिलाफ बोल रहे हैं, उसने एक ऐसी बहस को जन्म दे दिया है जो अंततः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए काम आसान करती दिख रही है।

विपक्ष की घेराबंदी और राहुल गांधी का नैरेटिव

राहुल गांधी का मुख्य तर्क यह है कि नरेंद्र मोदी का प्रभाव कम हो रहा है और मोदी सरकार अल्पकालिक है। इसके उलट, वास्तविकता यह है कि राहुल गांधी को बाहर से कम और अपने ही सहयोगियों से ज्यादा चुनौती मिल रही है। वे अक्सर यह माहौल बनाने में जुटे रहते हैं कि देश में वोट चोरी किए जा रहे हैं या पूरा तंत्र नरेंद्र मोदी के प्रभाव में काम कर रहा है। यहाँ तक कि वे ज्ञानेश कुमार जैसे अधिकारियों के नाम लेकर चुनावों में हार का ठीकरा उन पर फोड़ते हैं। हालांकि, अब विपक्ष के ही कुछ नेता इस तर्क को सिरे से खारिज कर रहे हैं और कांग्रेस के इतिहास को आईना दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस तो तब से चुनाव हार रही है जब ज्ञानेश कुमार या ईवीएम का नामोनिशान नहीं था।

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में घमासान

विपक्ष में चल रहे इस खेल का सबसे बड़ा हिस्सा आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच का टकराव है। जहाँ कांग्रेस बीजेपी को मुख्य दुश्मन बताकर सबको एकजुट करने की बात करती है, वहीं आम आदमी पार्टी कांग्रेस को ही बीजेपी की बी-टीम करार देने में जुटी है। हाल ही में, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पंजाब में आम आदमी पार्टी को निशाने पर लेते हुए कहा था कि जहाँ भी कांग्रेस मजबूत होती है, वहां आम आदमी पार्टी बीजेपी को लाभ पहुँचाने के लिए बीच में आ जाती है। इसके जवाब में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस की हार का एक लंबा-चौड़ा आंकड़ा पेश कर दिया है।

आम आदमी पार्टी का कांग्रेस पर तीखा प्रहार

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कांग्रेस की हार का एक विस्तृत विवरण जारी किया है, जो कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के समान है। संजय सिंह ने जिन राज्यों का जिक्र किया, वे इस प्रकार हैं:

  • उत्तर प्रदेश में 37 साल से कांग्रेस चुनाव हार रही है।
  • बिहार में 36 साल से कांग्रेस सत्ता से बाहर है।
  • पश्चिम बंगाल में 54 साल से पार्टी को हार का सामना करना पड़ रहा है।
  • तमिलनाडु में 59 साल का लंबा वनवास झेलना पड़ रहा है।
  • मध्य प्रदेश में 23 साल से कांग्रेस सत्ता से दूर है, बीच में केवल 1.5 साल के लिए सरकार बनी थी।
  • महाराष्ट्र और हरियाणा में 12 साल से कांग्रेस को हार मिल रही है।
  • ओडिशा में 26 साल से कांग्रेस का कोई जनाधार नहीं दिख रहा है।
  • असम में 11 साल, उत्तराखंड में 10 साल और गोवा में 14 साल से कांग्रेस जीत नहीं पा रही है।
  • सिक्किम में 47 साल, त्रिपुरा में 38 साल, मणिपुर में 10 साल और अरुणाचल प्रदेश में भी 10 साल से कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है।

संजय सिंह का तर्क है कि कांग्रेस को हार के लिए दूसरों को दोष देना बंद करना चाहिए और अपनी कमियों का आत्मचिंतन करना चाहिए। उन्होंने सीधा सवाल किया कि इतने राज्यों में जहाँ आम आदमी पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं था, वहाँ भी कांग्रेस दशकों से क्यों हार रही है?

समाजवादी पार्टी की एंट्री और सियासी धमाका

इस लड़ाई में अब अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी भी पूरी तरह कूद पड़ी है। उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे और चुनावी मतभेदों के चलते पहले ही दोनों दलों के बीच तनातनी चल रही थी, लेकिन अब मौका पाकर समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस की घेराबंदी शुरू कर दी है। समाजवादी पार्टी के नेता आईपी सिंह ने संजय सिंह के बयानों का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि कांग्रेस ने ही भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को खाद-पानी देकर सींचा है। उनके अनुसार, आज जो लोग लोकतंत्र के लिए खतरा बन गए हैं, उन्हें मजबूत करने में कांग्रेस की बड़ी भूमिका रही है।

विपक्ष की आपसी लड़ाई का मोदी को फायदा

कुल मिलाकर, विपक्ष का यह खेमा जो कभी नरेंद्र मोदी को डिबेट के लिए चुनौती देने या सरकार गिराने की बात करता था, अब खुद आपस में ही उलझकर रह गया है। अरविंद केजरीवाल की पार्टी कांग्रेस को बीजेपी का साथी बता रही है, तो कांग्रेस अरविंद केजरीवाल की तुलना ओवैसी से करके उन पर निशाना साध रही है। इस आपसी खींचतान ने स्थिति यह बना दी है कि राहुल गांधी के दावों की धमक कम होती जा रही है और विपक्ष की एकता का ढोल पूरी तरह फट गया है। यह घटनाक्रम न केवल राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाता है, बल्कि जनता के बीच विपक्ष की विश्वसनीयता को भी चोट पहुँचाता है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि विपक्ष की यह फूट सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ा राजनीतिक उपहार साबित हो रही है।

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