दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का कहर
दिवाली से ठीक पहले दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' श्रेणी के बेहद करीब पहुंचने के बाद प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान GRAP-III की पाबंदियां लागू कर दी हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 382 दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा 'बहुत खराब' श्रेणी को दर्शाता है। यदि यह स्तर 401 को पार कर जाता है, तो हवा 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज की जाएगी। फिलहाल दिल्ली की हवा उस खतरनाक दहलीज के मुहाने पर खड़ी है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
एनसीआर के अन्य शहरों की स्थिति
प्रदूषण का असर केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरा एनसीआर क्षेत्र जहरीली हवा की चपेट में है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर इस प्रकार रहा है:
- नोएडा में AQI 303 दर्ज किया गया है।
- ग्रेटर नोएडा में AQI 316 के स्तर पर है।
- गुरुग्राम में प्रदूषण का स्तर 368 तक पहुंच गया है।
- गाजियाबाद में AQI 257 दर्ज किया गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार, 301 से 400 के बीच का AQI 'बहुत खराब' माना जाता है, जबकि 401 से 500 का स्तर 'गंभीर' श्रेणी में आता है। गुरुग्राम और दिल्ली के आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि हवा में सांस लेना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
GRAP-III के तहत लागू होने वाली मुख्य पाबंदियां
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इससे पहले लागू GRAP-II के नियम तो जारी रहेंगे ही, लेकिन अब GRAP-III की अतिरिक्त सख्ती भी प्रभावी होगी। इसके तहत निम्नलिखित प्रतिबंध लागू किए गए हैं:
- निर्माण और तोड़फोड़ पर रोक: गैर-जरूरी निर्माण कार्यों और डिमोलिशन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल प्रदूषण का मुख्य कारण होती है, जिसे नियंत्रित करना अब प्राथमिकता है।
- पुराने वाहनों पर शिकंजा: BS-III मानकों वाले पेट्रोल और BS-IV मानकों वाले डीजल से चलने वाले चार पहिया वाहनों की सड़कों पर आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस इसकी निगरानी करेंगे।
- उद्योगों और खनन पर विराम: स्टोन क्रशर और सभी प्रकार की खनन गतिविधियों को तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए गए हैं।
- सड़कों की सफाई: सड़कों पर जमी धूल को उड़ने से रोकने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग को तेज किया जाएगा और प्रमुख मार्गों पर पानी का नियमित छिड़काव किया जाएगा।
- डीजल बसों की आवाजाही: दिल्ली-एनसीआर में आने वाली अंतरराज्यीय डीजल बसों पर रोक लगाई गई है। हालांकि, BS-VI या क्लीन फ्यूल से चलने वाली बसों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
- औद्योगिक इकाइयां: जो ईंट भट्टे और हॉट मिक्स प्लांट प्रदूषण नियंत्रण के तय मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, उन्हें तत्काल बंद करना होगा।
- भारी मालवाहक वाहन: दिल्ली में गैर-जरूरी मध्यम और भारी डीजल ट्रकों के प्रवेश पर भी पाबंदी लागू कर दी गई है ताकि धुएं के उत्सर्जन को कम किया जा सके।
- ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प: बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प चुनने पर विचार कर सकता है।
दिवाली के मौके पर प्रशासन की बड़ी चुनौती
ऐसे समय में जब दिवाली आने में दो दिन से भी कम समय शेष है, पूरे क्षेत्र में हवा का स्तर बिगड़ना चिंता का विषय है। प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इन GRAP-III नियमों का सख्ती से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। निर्माण स्थलों से लेकर औद्योगिक इकाइयों तक, नियमों को तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण नियंत्रण के ये उपाय केवल तभी प्रभावी हो सकते हैं जब सरकारी आदेशों के साथ-साथ आम नागरिक भी इनका पालन करें। फिलहाल, आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और इन प्रतिबंधों के प्रभाव पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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