दिवाली पर मिठाइयों से अलग बनाएं कुछ खास
दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही घरों में तरह-तरह के पकवान और मिठाइयां बनने लगती हैं। अमूमन लोग आंवला या नींबू का मुरब्बा तो खूब पसंद करते हैं, लेकिन अगर आप इस बार त्योहार के मौके पर कुछ अलग और नया स्वाद चखना चाहते हैं, तो सेब का मुरब्बा एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह मुरब्बा न केवल देखने में बेहद आकर्षक लगता है, बल्कि इसका स्वाद भी हर किसी को अपना दीवाना बना देता है। खास बात यह है कि यह कम समय और बहुत कम मेहनत में तैयार हो जाता है और काफी लंबे समय तक टिकाऊ भी रहता है।
बलिया के प्रसिद्ध कारीगर की स्पेशल रेसिपी
उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में आचार और मुरब्बे की काफी मशहूर दुकान चलाने वाले सोनापति गुप्ता (जिन्हें जिले भर में लोग एसपी गुप्ता के नाम से जानते हैं) ने इस खास सेब के मुरब्बे की पारंपरिक विधि साझा की है। बलिया जिले के अपायल गांव के रहने वाले एसपी गुप्ता का कहना है कि सेब का मुरब्बा बनाना बेहद आसान है और इसमें किसी भी तरह का कोई तामझाम नहीं होता है। उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया लगभग 2 घंटे में पूरी हो जाती है और ताजा मुरब्बा बनकर तैयार हो जाता है।
घर पर सेब का मुरब्बा बनाने की आसान विधि
सेब का स्वादिष्ट मुरब्बा तैयार करने के लिए कुछ मुख्य चरणों का पालन करना होता है:
- सेब की छिलाई और तैयारी: सबसे पहले ताजे और साबुत सेब लें। इन्हें चाकू या छीलनी की सहायता से अच्छी तरह से छील लें। ध्यान रहे कि यह मुरब्बा पूरे खड़े सेब से ही बनाया जाता है।
- सेब की गुदाई: छीलने के बाद सेब को अच्छी तरह गोदा (गुदाई) जाता है, ताकि चाशनी सेब के अंदर तक अच्छी तरह से समा सके।
- चाशनी तैयार करना: अब बर्तन में चीनी की चाशनी पकाई जाती है। चाशनी को तब तक पकाया जाता है जब तक कि यह गाढ़ी होकर बिल्कुल मधु (शहद) जैसी न हो जाए।
- फिटकरी का इस्तेमाल: जब चाशनी शहद जैसी गाढ़ी हो जाती है, तो उसमें थोड़ा सा फिटकरी डाल दिया जाता है।
- सेब को पकाना: अंत में तैयार चाशनी में गोदे हुए खड़े सेब डाल दिए जाते हैं और उन्हें चाशनी के साथ पकाया जाता है। इस तरह महज दो घंटे के भीतर सेब का स्वादिष्ट मुरब्बा तैयार हो जाता है।
प्रतापगढ़ से सीखी कारीगरी, आज शहर में हैं 4 शाखाएं
एसपी गुप्ता की इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। उन्होंने शुरुआत में प्रतापगढ़ की एक कंपनी में रहकर मुरब्बा और अचार बनाने का काम बहुत गहराई से सीखा था। वहां से बारीकियां सीखने के बाद उन्होंने बलिया आकर खुद की दुकान खोली और काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनके बनाए मुरब्बे और अचार की मांग इतनी बढ़ गई कि आज बलिया शहर में उनकी 4 अलग-अलग शाखाएं संचालित हो रही हैं।
उनकी सबसे पुरानी दुकान लगभग 38 साल पुरानी है, जो बलिया के मेन चौक में स्थित ओक्ड़ेगंज पुलिस चौकी के ठीक बगल में स्थित है। इसके अलावा उनकी दूसरी शाखा जगदीशपुर में, तीसरी शाखा नगर पंचायत के ठीक सामने और चौथी व अंतिम शाखा डीएम कार्यालय परिसर में स्थित है।
सेहत के लिए फायदेमंद और 240 रुपये किलो का भाव
एसपी गुप्ता बताते हैं कि उनका यह सेब का मुरब्बा ग्राहकों को 240 रुपए प्रति किलो के हिसाब से दिया जाता है। खड़े सेब से बना होने के कारण यह देखने में तो खूबसूरत लगता ही है, खाने में भी बेहद स्वादिष्ट होता है। पेट के स्वास्थ्य के लिए तो यह बहुत फायदेमंद चीज है। यही वजह है कि उनके इस मुरब्बे और अचार की मांग केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि बहुत दूर-दूर से आती है।
दिवाली पर मिठाइयों का सेहतमंद विकल्प
फल से बना यह मुरब्बा एक तरह की मिठास से भरपूर प्राकृतिक मिठाई ही है, जो बाजार की अन्य मिठाइयों की तुलना में कहीं न कहीं बेहतर है। इस दिवाली पर यह मुरब्बा न केवल मेहमानों को एक मधुर मिठास का अहसास कराएगा, बल्कि उनके स्वास्थ्य और सेहत का भी पूरा ख्याल रखेगा।
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