कोटा की मशहूर 'कड़के सेव': अलसी के तेल में तैयार होता है 100 साल पुराना जायका, दिवाली पर रहती है भारी मांग

शिक्षा नगरी कोटा में कोचिंग के साथ-साथ खानपान का भी अनूठा जायका है। अलसी के तेल में तैयार होने वाली 100 साल पुरानी पारंपरिक 'कड़के सेव' नमकीन की मांग दिवाली के मौके पर बहुत बढ़ जाती है, जिसे मोहन जी के परिवार की चौथी पीढ़ी सहेज रही है।

शिक्षा नगरी में जायके की अनोखी पहचान

राजस्थान का कोटा शहर केवल कोचिंग संस्थानों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहां का खानपान भी अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान रखता है। त्योहारों के मौसम में, खासकर दिवाली के पावन अवसर पर, मिठाइयों की मिठास के साथ-साथ नमकीन का तीखा स्वाद भी उत्सव की रौनक को दोगुना कर देता है।

100 साल पुरानी पारंपरिक रेसिपी और कड़के सेव

कोटा में तैयार होने वाली खास नमकीन कड़के सेव अपने जबरदस्त तीखेपन और कुरकुरेपन के कारण दूसरी नमकीनों से काफी अलग है। लगभग 100 साल पुराना जायका समेटे इस नमकीन की सबसे बड़ी खासियत इसका निर्माण माध्यम है। इसे अलसी के तेल में तैयार किया जाता है। अलसी के तेल के उपयोग की वजह से इसका पारंपरिक और प्रामाणिक स्वाद आज भी पूरी तरह से बरकरार है।

मोहन जी के परिवार की चौथी पीढ़ी संभाल रही कमान

इस स्वाद और परंपरा को सहेजने का काम मोहन जी के परिवार द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में मोहन जी के परिवार की चौथी पीढ़ी इस काम की जिम्मेदारी संभाल रही है और पीढ़ियों पुरानी इस कला को आगे बढ़ा रही है। दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के अवसर पर कोटा की इस स्पेशल कड़के सेव की मांग बाजारों में काफी बढ़ जाती है और लोग इसे चाव से खरीदते हैं।

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