यूरोप के एनर्जी स्टोरेज मार्केट में अडानी की धमक
भारतीय दिग्गज कारोबारी समूह अडानी ने अब यूरोप के पोर्ट और एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में बड़ा निवेश किया है। अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन ने यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्वतंत्र लिक्विड स्टोरेज कंपनी इवोस बी.वी. का अधिग्रहण करने का समझौता किया है। इस रणनीतिक सौदे की कुल कीमत 2.56 अरब यूरो यानी भारतीय रुपये में करीब 22,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इस अधिग्रहण के जरिए अडानी समूह अब सीधे तौर पर यूरोप के प्रमुख औद्योगिक और ऊर्जा केंद्रों में अपनी पहुंच बना चुका है।
सौदा और वित्तीय संरचना
अडानी पोर्ट्स की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वे नीदरलैंड स्थित इवोस में 100 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करेंगे। यह पूरी हिस्सेदारी कंपनी के वर्तमान मालिक इग्निओ इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स से खरीदी जा रही है। यह एक पूर्ण नकद सौदा है, जिसकी एंटरप्राइज वैल्यू 2.56 अरब यूरो तय की गई है और इक्विटी वैल्यू 1.18 अरब यूरो है। कंपनी के मुताबिक, इस सौदे के लिए फंड की व्यवस्था कर्ज के माध्यम से की जाएगी। हालांकि, इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए अभी संबंधित देशों की नियामक मंजूरियों और कर्मचारियों की प्रतिनिधि परिषद के साथ परामर्श की प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है।
पांच देशों में फैला है इवोस का व्यापक नेटवर्क
नीदरलैंड में मुख्यालय रखने वाली इवोस वर्तमान में यूरोप के पांच देशों में सक्रिय है। इसमें नीदरलैंड, जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम और माल्टा शामिल हैं। कंपनी का बुनियादी ढांचा यूरोप के अत्यंत महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों में स्थित है, जिसमें एम्स्टर्डम-रॉटरडैम-एंटवर्प क्षेत्र, हैम्बर्ग और भूमध्यसागर के अहम टर्मिनल शामिल हैं। इवोस के पास कुल आठ टर्मिनल हैं, जिनकी संयुक्त स्टोरेज क्षमता 63 लाख क्यूबिक मीटर है। ये टर्मिनल तरल उत्पादों के भंडारण और ऊर्जा आपूर्ति में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जिससे अडानी पोर्ट्स को वैश्विक स्तर पर अपने एनर्जी हब विस्तार में बड़ी मदद मिलेगी।
मजबूत वित्तीय आंकड़े
इवोस का वित्तीय प्रदर्शन काफी स्थिर रहा है। कैलेंडर वर्ष 2025 में कंपनी ने 392 मिलियन यूरो का रेवेन्यू अर्जित किया था। इस दौरान कंपनी का EBITDA 219 मिलियन यूरो दर्ज किया गया, जो इसके मजबूत संचालन का प्रमाण है। कंपनी का EBITDA मार्जिन करीब 56 फीसदी रहा है। यह अधिग्रहण CY25 EV/EBITDA के 11.7 गुना पर संपन्न हुआ है।
रणनीतिक लक्ष्य और भविष्य की योजना
अडानी पोर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अडानी ने इस डील को एक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि यह अधिग्रहण सालाना एक अरब टन कार्गो संभालने और एक एकीकृत ग्लोबल ट्रांसपोर्ट प्लेटफॉर्म बनाने के समूह के विजन को गति देगा। कंपनी का अनुमान है कि अधिग्रहण के बाद उनका संयुक्त प्रो-फॉर्मा नेट डेट-टू-EBITDA अनुपात 2.76 गुना रहेगा, जो वित्तीय वर्ष 2027 तक घटकर 2.5 गुना के आसपास आने की संभावना है। इस निवेश से अडानी पोर्ट्स न केवल यूरोप के ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करेगी, बल्कि भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा की ओर होने वाले बदलावों से जुड़े नए अवसरों का लाभ उठाने में भी सक्षम होगी।
https://www.indiatv.in/paisa/business/adani-ports-to-acquire-netherlands-based-evos-for-2-56-billion-euros-company-network-spanning-5-countries-2026-11-05-1252989