रमा एकादशी और गुरुवार का अद्भुत संयोग
हिंदू धर्मग्रंथों में कार्तिक मास का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। इस पवित्र महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2026 में 5 नवंबर, दिन गुरुवार को रमा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। इस बार का दिन इसलिए भी अत्यंत मंगलकारी माना जा रहा है क्योंकि एकादशी तिथि के साथ-साथ गुरुवार व्रत का भी दुर्लभ संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, इस दिन वैधृति योग और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष अनुकंपा प्राप्त करने के लिए यह दिन अत्यंत शुभ है। ऐसी मान्यता है कि रमा एकादशी और गुरुवार के दिन भक्तिभाव से पूजन करने से साधक के जीवन के समस्त संकट, दुख और दरिद्रता का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
दिवाली से ठीक पहले रमा एकादशी का महत्व
सनातन परंपरा में दिवाली का पर्व सुख, समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष 8 नवंबर को महापर्व दिवाली मनाई जाएगी। दिवाली से ठीक तीन दिन पहले आने वाली रमा एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत गहरा महत्व होता है। 'रमा' माता लक्ष्मी का ही एक नाम है, इसलिए इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की विधिवत आराधना की जाती है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस पावन तिथि पर सच्चे मन से उपवास रखते हैं और श्रीहरि तथा मां लक्ष्मी की उपासना करते हैं, उनके घर में सदैव सुख-शांति और धन-धान्य का वास बना रहता है। इसके साथ ही, इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के पूर्व जन्मों तथा इस जन्म के सभी जाने-अनजाने में हुए पाप नष्ट हो जाते हैं। कुंडली में बृहस्पति ग्रह (गुरु) की स्थिति मजबूत करने के लिए भी यह दिन उत्तम फलदायी माना गया है। रमा एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 6 नवंबर को द्वादशी तिथि में किया जाएगा।
भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा विधि
गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति और संपूर्ण जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस विशेष दिन पर सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ पीले रंग के वस्त्र धारण करें, क्योंकि पीला रंग भगवान विष्णु और गुरु ग्रह को अत्यंत प्रिय है।
पूजा की संपूर्ण विधि इस प्रकार है:
- घर के पूजा स्थल या मंदिर की अच्छी तरह सफाई करें और भगवान श्रीहरि विष्णु तथा माता लक्ष्मी की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें।
- भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं या जल के छींटे देकर पवित्र करें।
- श्रीहरि को पीले पुष्प, पीले फल, पीला चंदन, मुनक्का, गुड़ और चने की दाल अर्पित करें।
- भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अवश्य सम्मिलित करें, क्योंकि बिना तुलसी के वे भोग स्वीकार नहीं करते हैं।
- देसी घी का दीपक और धूपबत्ती जलाकर भगवान विष्णु के महामंत्रों का जाप करें।
- गुरुवार व्रत एवं रमा एकादशी की पौराणिक कथा का पाठ करें अथवा ध्यानपूर्वक श्रवण करें।
- पूजा के अंत में आरती उतारें और परिवार के कल्याण तथा सुख-समृद्धि की मंगलकामना करें।
5 नवंबर 2026 का विस्तृत पंचांग
आज के पंचांगीय गणित के अनुसार, तिथि, नक्षत्र और करण की स्थिति इस प्रकार रहेगी:
- आज की तिथि: एकादशी तिथि सुबह 10:35 बजे तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे तक मान्य रहेगी। (एकादशी तिथि की शुरुआत बुधवार को सुबह 11:03 बजे हुई थी)।
- आज का नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र, जो 6 नवंबर को सुबह 03:55 बजे तक रहेगा।
- आज का करण: बालव करण सुबह 10:35 बजे तक रहेगा, इसके उपरांत कौलव करण रात 10:30 बजे तक रहेगा।
- आज का योग: वैधृति योग, जो 6 नवंबर को सुबह 05:09 बजे तक रहेगा।
- आज का पक्ष: कार्तिक माह, कृष्ण पक्ष।
- आज का दिन: गुरुवार।
- चंद्र राशि: चंद्रमा सिंह राशि में संचरण करेंगे और उसके बाद कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।
- सूर्य राशि: सूर्य देव तुला राशि में विराजमान रहेंगे।
- दिशाशूल: दक्षिण दिशा (तथा पंचांग अनुसार उत्तर दिशा)।
सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
दिनांक 5 नवंबर 2026 को खगोलीय पिंडों के उदयास्त का समय इस प्रकार रहेगा:
- सूर्योदय का समय: सुबह 06:38 बजे (पंचांग सारिणी अनुसार सुबह 06:36 बजे)।
- सूर्यास्त का समय: शाम 05:42 बजे (पंचांग सारिणी अनुसार शाम 05:34 बजे)।
- चंद्रोदय का समय: रात 02:49 बजे (6 नवंबर को तड़के 03:46 बजे)।
- चंद्रास्त का समय: दोपहर 03:11 बजे (पंचांग सारिणी अनुसार दोपहर 03:02 बजे)।
5 नवंबर 2026 के शुभ मुहूर्त और योग
शास्त्रों के अनुसार, शुभ कार्यों की शुरुआत, पूजा-पाठ और नए अनुष्ठानों के लिए शुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:52 बजे से सुबह 05:44 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक (सारिणी अनुसार सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक)।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 01:55 बजे से दोपहर 02:39 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:34 बजे से शाम 06:00 बजे तक।
- अमृत काल: रात 08:35 बजे से रात 10:12 बजे तक (सारिणी अनुसार रात 08:36 बजे से रात 10:13 बजे तक)।
- निशिता मुहूर्त: रात 11:40 बजे से देर रात 12:32 बजे (6 नवंबर) तक।
- शिववास: सुबह 10:35 बजे तक कैलाश पर, उसके पश्चात नंदी पर।
आज का अशुभ समय और राहुकाल
ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल और अन्य अशुभ समय के दौरान मांगलिक कार्यों की शुरुआत को वर्जित माना गया है। 5 नवंबर 2026 के अशुभ काल की समय-सीमा निम्नवत् है:
- राहुकाल: दोपहर 01:33 बजे से दोपहर 02:56 बजे तक (सारिणी अनुसार दोपहर 01:28 बजे से दोपहर 02:50 बजे तक)।
- यमगंड काल: सुबह 06:38 बजे से सुबह 08:01 बजे तक (सारिणी अनुसार सुबह 06:36 बजे से सुबह 07:59 बजे तक)।
- गुलिक काल: सुबह 09:24 बजे से सुबह 10:47 बजे तक (सारिणी अनुसार सुबह 09:21 बजे से सुबह 10:43 बजे तक)।
- दुर्मुहूर्त: सुबह 10:16 बजे से सुबह 10:59 बजे तक।
- वर्ज्यम: सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक।
- विडाल योग: सुबह 03:55 बजे से सुबह 06:37 बजे तक (6 नवंबर)।
https://hindi.news18.com/news/dharm/aaj-ka-panchang-5-november-2026-thursday-kartik-rama-ekadashi-vrat-today-2026-vishnu-puja-and-muhurat-shubh-yog-rahu-kaal-disha-shool-moon-time-today-10962714.html