उत्तराखंड में कुदरत का कहर, केदारताल ट्रैक पर बर्फीले तूफान में खो गई 8 जिंदगियां

गंगोत्री से केदारताल की ट्रैकिंग पर निकले 12 सदस्यों के दल पर हिमस्खलन और भारी बर्फबारी का खतरा मंडराया, जिसमें 8 ट्रैकर्स लापता हो गए हैं। बचाव दल हेलीकॉप्टर की मदद से खराब मौसम के बीच उनकी तलाश कर रहा है।

पहाड़ों के रोमांच के बीच छाया मातम

उत्तराखंड की ऊंचाइयों पर ट्रैकिंग का शौक रखने वाले पर्यटकों के लिए उस समय मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा, जब केदारताल के रास्ते में हिमस्खलन और भीषण बर्फबारी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। गंगोत्री से लगभग 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित केदारताल की ओर कूच करने वाले 12 सदस्यीय ट्रैकिंग दल के 8 सदस्य लापता हो गए हैं। कुदरत की इस मार ने न केवल पर्वतारोहियों के परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती पेश की है। गनीमत रही कि दल के 4 सदस्य सुरक्षित लौटने में सफल रहे, लेकिन बाकी 8 लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

लापता ट्रैकर्स की पहचान और पृष्ठभूमि

लापता हुए लोगों में पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के 5 युवक शामिल हैं। इनमें तापस बाउरी, रतन घोष, रिंटू मंडल और उदय घोष सालबानी गांव के रहने वाले हैं, जबकि मनोज खवास केशरा गांव से ताल्लुक रखते हैं। इसके अलावा दल के 3 अन्य सदस्य लापता हैं, जिनमें से 2 उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं और 1 सदस्य उत्तराखंड के उत्तरकाशी का है। बांकुरा के ये पांचों युवक 24 अक्टूबर को ही अपने अभियान के लिए घर से रवाना हुए थे और उन्हें नवंबर की शुरुआत में वापस लौटना था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

घटना का क्रम और बचाव अभियान

मिली जानकारी के अनुसार, इस 12 सदस्यीय दल में 4 शेरपा और 1 सहायक भी शामिल थे। इन्होंने पूरी तैयारी के साथ बेस कैंप से अपनी चढ़ाई शुरू की थी। हालांकि, जब वे 4,000 मीटर की ऊंचाई वाले बर्फीले इलाके से गुजर रहे थे, तभी अचानक मौसम ने करवट ली और भीषण बर्फबारी के बीच हिमस्खलन ने उन्हें घेर लिया। इस हादसे में 8 लोग कहीं खो गए, जबकि 1 शेरपा और 1 सहायक समेत 4 सदस्य किसी तरह जान बचाकर 30 अक्टूबर को अपने गंतव्य तक पहुंचने में कामयाब रहे। इन लोगों ने ही बाद में अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

इस सूचना के मिलते ही उत्तराखंड सरकार ने तत्परता दिखाते हुए एसडीआरएफ की टीम को मौके पर भेजा। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के हेलीकॉप्टर की मदद से पिछले 2 दिनों से लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन अत्यधिक ऊंचाई और खराब मौसम की वजह से बचाव दल को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन और सरकार का रुख

इस हादसे पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने फेसबुक के माध्यम से जानकारी दी कि राज्य सरकार उत्तराखंड के उच्च अधिकारियों और एसडीआरएफ के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। सीएम ने कहा, दिल्ली में मौजूद रेजिडेंट कमिश्नर का कार्यालय भी बचाव कार्यों की पल-पल की निगरानी कर रहा है। उन्होंने बांकुरा के जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे पीड़ित परिवारों के साथ चौबीसों घंटे संपर्क में रहें और उन्हें हर संभव रसद व भावनात्मक संबल प्रदान करें।

बांकुरा के जिला मजिस्ट्रेट अनीश दासगुप्ता ने 3 नवंबर को इस बात की पुष्टि की कि जिला प्रशासन की टीमें प्रभावित परिवारों के पास पहुंची हैं और उन्हें मदद का भरोसा दिलाया गया है। परिजनों के अनुसार, वे लगातार अपने बच्चों के संपर्क में थे, लेकिन पिछले 2 से 3 दिनों से फोन बंद आने के कारण संपर्क पूरी तरह टूट चुका है।

बचाव में आ रही चुनौतियां

उत्तराखंड सरकार का कहना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम कभी भी बदल सकता है। केदारताल क्षेत्र में बर्फ के बवंडर और प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते सर्च ऑपरेशन की रफ्तार धीमी है। हेलीकॉप्टर की उड़ान और जमीनी स्तर पर एसडीआरएफ की टीम की पहुंच के बावजूद, अभी तक लापता लोगों का पता नहीं चल पाया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि बचाव कार्यों में कोई भी कसर नहीं छोड़ी जाएगी और जब तक दल के सभी सदस्यों का पता नहीं लग जाता, यह अभियान युद्ध स्तर पर जारी रहेगा। फिलहाल पूरे इलाके में तलाशी का दायरा बढ़ा दिया गया है, लेकिन उम्मीदें धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही हैं क्योंकि लापता लोगों के मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहे हैं।

https://hindi.news18.com/news/nation/8-lives-lost-in-snowstorm-on-gangotri-kedartal-trek-sdrf-rescue-operation-on-10960799.html