खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। होर्मुज जलमार्ग के बेहद महत्वपूर्ण इलाके 'केशम द्वीप' पर हुए हमलों ने पूरे मध्य-पूर्व को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए अपनी सत्ता पर पकड़ बनाए रखने की बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं। वैश्विक बाजारों में इन हमलों के कारण भारी उथल-पुथल देखी जा रही है। यह संघर्ष उस गतिरोध की अगली कड़ी है जो फरवरी के अंतिम दिनों में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े पैमाने के हमलों के बाद शुरू हुआ था। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने सबसे पहले इन हमलों की पुष्टि की थी।
हमलों की गोपनीयता और कूटनीतिक चुप्पी
इन हमलों को लेकर अमेरिका की रणनीति काफी अस्पष्ट दिखाई दे रही है। हालांकि ट्रंप ने पहले ईरान के साथ किसी प्रकार के समझौते की संभावना के संकेत दिए थे, लेकिन उनके बयानों की अनिश्चितता ने इस स्थिति को और उलझा दिया है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल', 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' और CNN जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ये हमले 'बचाव' की कार्रवाई के तहत किए गए थे। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने इन हमलों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। जानकारों का मानना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि यह संदेश न जाए कि अमेरिका फिर से किसी बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत कर रहा है। जब AFP ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड से इस पर प्रतिक्रिया मांगी, तो वहां से कोई जवाब नहीं मिला।
केशम द्वीप पर धमाके और ईरानी रुख
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने पुष्टि की है कि केशम द्वीप पर सिलसिलेवार धमाके हुए हैं। स्थानीय निवासियों ने आसमान में दो विमानों को उड़ते हुए देखने का दावा किया है, हालांकि हमलों के सटीक कारणों और स्वरूप पर अभी भी संशय बना हुआ है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वीकार किया है कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष रूप से गहन बातचीत चल रही है। तेहरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर घालीबाफ ने स्पष्ट किया है कि भले ही ईरान ने वॉशिंगटन को एक तर्कसंगत जवाब दिया हो, लेकिन अब युद्ध को टालने की जिम्मेदारी पूरी तरह से अमेरिका के कंधों पर है।
उच्च-स्तरीय संदेशों का आदान-प्रदान
पिछले कुछ दिनों में राजनयिक स्तर पर भी हलचल तेज हुई है। 'एक्सिओस' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वेंस ने ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक पत्र भेजा है, जिसमें नई बातचीत की संभावना जताई गई है। ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ ने अमेरिका से मिले इन संदेशों को अपनी जीत की स्वीकृति के रूप में देखा है।
शर्तों का दौर और धमकियों का सिलसिला
रविवार को एक साक्षात्कार के दौरान विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अपनी शर्तें स्पष्ट कर दीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ओमान और ईरान के बीच बनी सहमति का सम्मान करना चाहिए ताकि जलडमरूमध्य से आवाजाही सुचारू रूप से हो सके। साथ ही, उन्होंने प्रतिबंध हटाने और क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम करने की मांग रखी है। हालांकि, दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप तेहरान के खिलाफ लगातार आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं। उन्होंने रविवार को फिर से चेतावनी दी कि अमेरिका को किसी भी समय ईरान पर एक कड़ी चोट करनी पड़ सकती है।
परमाणु स्थल और तेहरान की कड़ी चेतावनी
तनाव उस समय और बढ़ गया जब शनिवार को अमेरिकी नेता ने 'पिकएक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) को निशाना बनाने की बात कही, जिसे अमेरिका एक संदिग्ध परमाणु स्थल मानता है। तेहरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। ईरानी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका युद्ध को आगे बढ़ाता है, तो उन्हें इसका करारा और व्यापक जवाब मिलेगा। तेहरान में एक बड़ा बैनर भी लगाया गया है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर के ऊपर उन्हें मारने की चेतावनी लिखी गई है, जो दोनों देशों के बीच कटुता को दर्शाती है।
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