झारखंडी स्वाद और पारंपरिक तरीका
नॉनवेज के शौकीनों के लिए जमशेदपुर के बिष्टुपुर इलाके से एक बहुत ही दिलचस्प खबर सामने आई है। शहर की मशहूर खाओ गली में एक ऐसा स्टॉल है, जहां का चिकन खाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है। ट्राइबल रसोई नाम के इस छोटे से स्टॉल पर मिलने वाला पोड़म चिकन अपने खास स्वाद और उसे बनाने के पारंपरिक तरीके के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि आप भी चिकन खाने के शौकीन हैं और कुछ ऐसा चखना चाहते हैं जो बाजार के सामान्य चिकन करी से बिल्कुल अलग हो, तो आपको यहाँ जरूर जाना चाहिए।
कैसे तैयार होता है खास पोड़म चिकन
इस अनूठी डिश को विशाल हांसदा द्वारा संचालित ट्राइबल रसोई में तैयार किया जाता है। यहाँ पोड़म चिकन बनाने की विधि आम होटलों और ढाबों से काफी अलग है। सबसे पहले चिकन को विशेष मसालों के साथ मैरिनेट किया जाता है, जिसके बाद इसे साल के पत्तों में अच्छी तरह लपेटा जाता है। इस प्रक्रिया के बाद पत्तों में बंद चिकन को लकड़ी की धीमी आंच पर पकाया जाता है। इस पारंपरिक तकनीक के कारण चिकन में लकड़ी की सोंधी खुशबू बस जाती है और इसका स्वाद भी दोगुना हो जाता है। पूरे 15 मिनट की मेहनत के बाद जब यह पककर तैयार होता है, तो खाने वालों को इसका लाजवाब स्वाद मिलता है।
सेहत और स्वाद का बेहतरीन संगम
आजकल के दौर में लोग अपने खानपान को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं। अक्सर लोग चिकन के नाम पर अधिक तेल और मसालों के उपयोग से बचते हैं। पोड़म चिकन की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसे बनाते समय न तो बहुत ज्यादा तेल का इस्तेमाल किया जाता है और न ही भारी भरकम मसालों की भरमार होती है। लकड़ी की आंच पर साल के पत्तों के अंदर पकने के कारण यह चिकन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी काफी बेहतर माना जाता है। प्रोटीन से भरपूर यह डिश उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो कम कैलोरी और बिना तेल वाली चीजें खाना पसंद करते हैं।
मात्र 50 रुपये में परोसा जाता है स्वाद
महंगाई के इस दौर में बाहर खाना काफी महंगा हो गया है, लेकिन ट्राइबल रसोई में आपको बजट की चिंता करने की जरूरत नहीं है। यहां मात्र 50 रुपये खर्च करके आप चिकन के 10 से 12 पीस का आनंद ले सकते हैं। कम बजट में इतनी अच्छी मात्रा में स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक चिकन मिलना अपने आप में काफी बड़ी बात है। इसे परोसने का अंदाज भी बहुत ही देसी है, जहां इसे ताजा प्याज और तीखी हरी चटनी के साथ सर्व किया जाता है, जो इसके स्वाद को और भी अधिक निखार देता है।
शाम होते ही शुरू होती है भीड़
अगर आप इस अनोखे झारखंडी व्यंजन का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो शाम 6 बजे के बाद बिष्टुपुर की खाओ गली का रुख करना बेहतर होगा। यहाँ पहुँचने वाले ग्राहकों का कहना है कि लकड़ी की आंच पर तैयार चिकन का अनुभव घर या सामान्य रेस्टोरेंट में मिलने वाले चिकन से काफी अलग होता है। जो लोग हर बार एक ही तरह का चिकन खाकर ऊब चुके हैं, उनके लिए यह एक नया अनुभव है। यदि आप जमशेदपुर में हैं या यहां आने की योजना बना रहे हैं, तो शाम के समय ट्राइबल रसोई पर जाकर इस पारंपरिक पोड़म चिकन का स्वाद लेना बिल्कुल न भूलें।
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