बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर भीषण हमले, बीएलए का दावा- मुनीर के 129 सैनिकों को उतारा मौत के घाट

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोही समूहों ने सुरक्षा बलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिसमें बीएलए ने 129 सैनिकों को मार गिराने का बड़ा दावा किया है।

बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों पर लगातार हमले

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सोमवार को नुश्की और खारान जैसे संवेदनशील जिलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर सिलसिलेवार हमले किए गए। इन घटनाओं में सेना को भारी नुकसान होने की खबरें आ रही हैं, हालांकि पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों में तैनात सुरक्षाकर्मी विद्रोहियों के निशाने पर हैं और वहां के हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।

बीएलए का बड़ा दावा

बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट यानी बीएलएफ ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। संगठन के प्रवक्ता मेजर ग्वहराम बलूच द्वारा जारी मासिक रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर महीने में चलाए गए कुल 25 सैन्य अभियानों के दौरान 129 से अधिक पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया कर्मियों को मौत के घाट उतार दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नुश्की जिले के अहमद वाल इलाके में हथियारबंद लड़ाकों ने पैदल गश्त कर रहे और वाहनों में सवार सैनिकों पर घात लगाकर हमला किया। वहीं, खारान जिले में एक सैन्य वाहन को बारूदी सुरंग के जरिए विस्फोट कर उड़ा दिया गया। इलाके में बारूदी सुरंगें बिछाए जाने की वजह से पाकिस्तानी सेना की आवाजाही पर गंभीर संकट पैदा हो गया है।

झड़प और ड्रोन हमले

ये ताजा हमले 1 नवंबर को खारान के लिजाय इलाके में हुई भीषण झड़पों के बाद सामने आए हैं। स्थानीय खबरों के अनुसार, उस दौरान हुए जोरदार विस्फोट और मुठभेड़ में कम से कम 8 पाकिस्तानी सैनिक या तो मारे गए या गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दौरान विद्रोहियों ने एक क्वाडकॉप्टर ड्रोन को भी मार गिराने का दावा किया है, जो पाकिस्तानी सेना की निगरानी क्षमताओं पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

ऑपरेशन अलमास और अन्य हमले

विद्रोही समूहों ने अपनी रणनीति को और अधिक आक्रामक बना लिया है। बीएलएफ ने 'ऑपरेशन अलमास' के नाम से चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 80 से अधिक सुरक्षा कर्मियों को मार गिराने का दावा किया है। इस अभियान में सैन्य ठिकानों, सुरक्षा काफिलों और बख्तरबंद वाहनों को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया। इसके अतिरिक्त, बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स यानी बीआरजी ने दावा किया है कि उनके लड़ाकों ने कच्छी जिले के सन्नी इलाके में स्थित एक सैन्य शिविर पर कब्जा कर लिया और इस दौरान 12 सुरक्षाकर्मियों को मौत की नींद सुला दिया। इतना ही नहीं, संगठन ने पंजाब के रहीम यार खान जिले में मौजूद गैस पाइपलाइन को विस्फोट करके क्षतिग्रस्त करने का भी दावा किया है। यह वही पाइपलाइन है जो डेरा बुगती के सुई इलाके से पंजाब तक गैस की आपूर्ति करती है।

शहबाज शरीफ सरकार की विफलता

बलूचिस्तान की ये हिंसक घटनाएं दर्शाती हैं कि पाकिस्तान के अंदरूनी हालात कितने नाजुक और नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। पहले से ही खैबर पख्तूनख्वाह में चल रहे बवंडर के बीच, अब बलूचिस्तान में भी शहबाज शरीफ की सरकार अपनी पकड़ खोती नजर आ रही है। एक ओर पाकिस्तानी नेतृत्व बलूचिस्तान की खनिज संपदा की नीलामी करके राजस्व कमाने के सपने देख रहा है, तो दूसरी ओर वह स्थानीय निवासियों का विश्वास जीतने में पूरी तरह विफल रहा है। विद्रोही समूहों के बढ़ते हमलों के चलते अब अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का यहां आना और निवेश करना लगभग असंभव सा प्रतीत हो रहा है।

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