बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने करीब चार दशक लंबे सार्वजनिक जीवन में परिवारवाद के खिलाफ लगातार मुखर रहे हैं। यही वह मुद्दा रहा है जिस पर वे लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस की वंशवादी राजनीति को घेरते आए हैं। जेडीयू के नेता भी यह दावा करते रहे हैं कि नीतीश कुमार ने कभी अपने परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में आगे बढ़ाने का प्रयास नहीं किया।
बदलते समीकरण और निशांत की एंट्री
लेकिन हालात अब बदलते दिख रहे हैं। नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उनके बेटे निशांत कुमार की पार्टी तथा बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के भीतर मौजूदगी दर्ज हो चुकी है। यह बदलाव जेडीयू के लिए केवल व्यावहारिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैचारिक रूप से भी एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
संजय झा ने खोले पत्ते
इसी बदलाव को लेकर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने एक साक्षात्कार में कई अहम बातें साझा की हैं। उन्होंने पहली बार इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखते हुए पार्टी के सामने मौजूद चुनौतियों की ओर भी इशारा किया है।
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