ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कांग्रेस को बड़ा झटका, क्या मोदी-शाह की रणनीति के आगे विपक्ष होगा पस्त?

कांग्रेस और विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत और विश्व बैंक की नई रिपोर्ट कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक प्रगति और गरीबी उन्मूलन के आंकड़े विपक्ष के दावों पर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं।

विपक्ष का हंगामा और जमीनी हकीकत

देश में एक तरफ राहुल गांधी और विपक्षी दलों का गठबंधन लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र खतरे में है और वोट चोरी किए जा रहे हैं। हालांकि, राजनीति केवल चुनावी मंचों पर दिए गए बयानों या विरोध प्रदर्शनों तक सीमित नहीं होती है। जनता का असली सरोकार देश की अर्थव्यवस्था, आम नागरिक के जीवन स्तर, बुनियादी ढांचे के विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होता है। दिल्ली के रामलीला मैदान में वोट बचाओ और देश बचाओ रैली के जरिए विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है, लेकिन इस दौरान उन वास्तविक मुद्दों की अनदेखी कर दी गई जो सीधे देश की प्रगति से जुड़े हैं।

दिल्ली के व्यापारियों और आम नागरिकों का मानना है कि त्योहारों के इस मौसम में लगातार रैलियों और प्रदर्शनों से कारोबार पर विपरीत असर पड़ता है। बैलेट पेपर बनाम ईवीएम की बहस में पहले भी जनता राहुल गांधी के नैरेटिव को सिरे से खारिज कर चुकी है। चुनावी हार की खीझ में मोदी के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिशें लगातार जारी हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब चुनाव आयोग और एसआईआर से जुड़े मामले पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं, तो सड़कों पर हंगामा करने का क्या औचित्य है? एक नवंबर की तारीख को दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की रैली, बीजेपी का सिख दंगों के विरोध में पैदल मार्च और बीजेपी द्वारा जारी किया गया वीडियो, जिसमें रैली के फ्लॉप होने का दावा किया गया, दिन भर सुर्खियों में बने रहे।

मोदी सरकार की उपलब्धियां और वैश्विक प्रशंसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शासन के वे कीर्तिमान स्थापित किए हैं जो दशकों से सत्ता में रहे पूर्व प्रधानमंत्रियों के लिए एक सपना ही रहे। गरीबी हटाओ के नारे भारत में इंदिरा गांधी के समय से दिए जा रहे थे, लेकिन गरीबों की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। आज स्थिति यह है कि विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत में गरीबी उन्मूलन की रफ्तार को सराह रही हैं। विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2011 से 2023 के बीच लगभग 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी के दायरे से बाहर निकले हैं। यह एक अभूतपूर्व उपलब्धि है जो मोदी सरकार की नीतियों के कारण संभव हो सकी है।

विकास से लेकर अर्थव्यवस्था और रक्षा क्षेत्र तक भारत ने अपनी धाक जमाई है। वैश्विक स्तर पर युद्ध के माहौल और आर्थिक संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार थमी नहीं है। बड़ी-बड़ी रक्षा डील्स और स्वदेशी रक्षा तकनीक के दम पर भारत अब अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह आत्मनिर्भर बन रहा है। भारत के रक्षा बजट में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। साल 2013-14 में जो रक्षा बजट करीब 2.53 लाख करोड़ रुपये था, वह 2026-27 में बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

तकनीक और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय

भारत की तकनीकी क्षमता का लोहा पूरी दुनिया मान रही है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F18 रॉकेट का सफल प्रक्षेपण है। इस मिशन के जरिए अगली पीढ़ी का नेविगेशन उपग्रह NVS-03 कक्षा में स्थापित किया गया है, जिससे अमेरिका पर निर्भरता कम हो गई है। यह दर्शाता है कि भारत की कहानी केवल चुनावी आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास के ठोस स्तंभों पर आधारित है।

गरीबी उन्मूलन का गणित और विश्व बैंक के आंकड़े

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट भारत की बदलती तस्वीर को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। वर्ष 2011 में भारत की 57.7 फीसदी आबादी 4.20 डॉलर प्रतिदिन से कम पर अपना जीवन यापन कर रही थी, जो 2023 तक घटकर 16.1 फीसदी पर आ गई है। यदि इसे 3 डॉलर प्रतिदिन के मानक पर देखें, तो 2011 में यह आंकड़ा 27.1 फीसदी था, जो 2023 में मात्र 2.6 फीसदी रह गया है। वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि 2028 तक यह संख्या और घटकर 12.1 फीसदी हो सकती है।

इस सफलता के पीछे के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:

  • उपभोग में निरंतर और मजबूत बढ़त।
  • रोजगार के नए और व्यापक अवसर।
  • खाद्य सब्सिडी और वितरण प्रणाली में सुधार।
  • कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि।
  • वर्ष 2017 से 2023 के बीच रोजगार करने वालों की संख्या में 13.4 करोड़ की रिकॉर्ड वृद्धि।

सिस्टम में सुधार और भ्रष्टाचार पर प्रहार

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने स्वीकार किया था कि केंद्र से भेजे गए एक रुपये में से मात्र 15 पैसे ही आम आदमी तक पहुँचते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने जनधन, आधार और मोबाइल की JAM त्रिमूर्ति के जरिए बिचौलियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से आज सरकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुँच रही है, जिससे खरबों रुपये का भ्रष्टाचार रुका है।

इसके साथ ही कोरोना काल से लेकर अब तक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के जरिए 80 करोड़ नागरिकों को मुफ्त राशन सुनिश्चित किया गया है। 4 करोड़ पक्के मकान, 11 करोड़ शौचालय और 10 करोड़ से अधिक उज्ज्वला गैस कनेक्शनों ने करोड़ों गरीबों के जीवन में बदलाव ला दिया है।

विकास की वैश्विक गति और भविष्य की राह

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, तमाम विपरीत वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की जीडीपी ग्रोथ प्रोजेक्शन को 7 फीसदी कर दिया गया है। भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है। ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद अब भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है।

EY की India@100 रिपोर्ट इस विकास यात्रा का भविष्य बताती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि अनुकूल परिस्थितियों में भारत 2047-48 तक 26 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है। मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए लाई गई PLI योजनाएं इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि भारत को केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। हालांकि रोजगार और वेतन असमानता जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि पिछले एक दशक में भारत ने गरीबी से लड़ने की जो नीति अपनाई है, वह अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है और विपक्ष के निराधार आरोपों को आईना दिखाने के लिए पर्याप्त है।

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