दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर कस्टम्स अधिकारियों ने एक बड़े ड्रग्स तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 15.38 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा (वीड) जब्त किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत करीब 5.38 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस मामले में दो यात्रियों को गिरफ्तार किया गया है, जो मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से दिल्ली पहुंचे थे।
खुफिया सूचना पर पहले से थी नजर
कस्टम्स अधिकारियों को खुफिया जानकारी और यात्रियों की प्रोफाइलिंग के आधार पर दोनों संदिग्धों की हरकतों की भनक पहले से ही लग चुकी थी। अधिकारी लगातार उनकी गतिविधियों पर निगरानी बनाए हुए थे। दोनों यात्री फ्लाइट D7-182 से दिल्ली पहुंचे थे और ग्रीन चैनल पार कर एयरपोर्ट से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे थे, तभी उन्हें रोककर पूछताछ शुरू की गई।
नए गीजरों पर उठा शक
जांच के दौरान अधिकारियों का ध्यान इस बात पर गया कि दोनों यात्री अपने आम सामान के साथ-साथ दो बिल्कुल नए गीजर भी लेकर आए थे। विदेश यात्रा से लौट रहे यात्रियों के पास नए गीजर देखकर अधिकारियों के मन में संदेह पैदा हुआ और उनसे गहराई से पूछताछ की गई।
पूछताछ में दोनों यात्रियों के बयानों में कई विरोधाभास सामने आए। अधिकारियों ने उनके मोबाइल फोन की भी पड़ताल की, जिसमें कुछ संदिग्ध जानकारियां मिलीं। बढ़ते शक के बीच कस्टम्स टीम ने दोनों गीजरों की दोबारा एक्स-रे स्कैनिंग कराने का निर्णय लिया।
स्कैनिंग में दिखी असामान्य संरचना
स्कैनिंग के दौरान गीजरों के भीतर असामान्य बनावट नजर आई, जिससे यह साफ संकेत मिला कि उनमें कुछ छिपाया गया है। इसके बाद अधिकारियों ने दोनों गीजरों को खोलकर बारीकी से जांच की। पड़ताल में पता चला कि गीजरों के अंदर बेहद सुनियोजित और तकनीकी तरीके से छिपाने का खास इंतजाम किया गया था।
145 वैक्यूम-सील पैकेट बरामद
गीजरों के भीतर से कुल 145 वैक्यूम-सील पैकेट निकाले गए, जिनमें हरे रंग का मादक पदार्थ भरा हुआ था। प्रारंभिक जांच और परीक्षण में यह पदार्थ हाइड्रोपोनिक वीड (गांजा) पाया गया। बरामद ड्रग्स का कुल वजन 15.38 किलोग्राम दर्ज किया गया।
कस्टम्स अधिकारियों ने पूरी खेप को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 के तहत जब्त कर लिया है। साथ ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की आशंका
अधिकारियों के अनुसार, तस्करी का यह तरीका बेहद पेशेवर और सुनियोजित था। गीजर जैसे घरेलू उपकरणों में ड्रग्स छिपाकर लाने की कोशिश इस ओर इशारा करती है कि इसके पीछे कोई संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद ड्रग्स की यह खेप किस नेटवर्क से जुड़ी है, इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और दिल्ली में इसे किस व्यक्ति या समूह तक पहुंचाया जाना था। कस्टम्स और अन्य एजेंसियां मामले के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही हैं।
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