मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे हादसा: आठ साल की कानूनी जंग के बाद परिवार को मिला 1.80 करोड़ का मुआवजा

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 2018 में हुए एक भीषण सड़क हादसे में माता-पिता को खोने वाले अनाथ बच्चों के लिए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा मंजूर किया है। यह फैसला आठ साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया है, जिसमें ट्रिब्यूनल ने ट्रक और कार चालक दोनों की लापरवाही को हादसे का कारण माना है।

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर काल बना एक ब्रेक

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर आज से करीब आठ साल पहले हुआ एक सड़क हादसा एक खुशहाल परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ गया। 23 दिसंबर 2018 को अंकित भूपिंदरसिंह चुग अपनी पत्नी संजना और दो नाबालिग बच्चों के साथ कार में सवार होकर सफर कर रहे थे। उसी दौरान आगे चल रहे एक ट्रक के ड्राइवर ने अचानक ऐसी रफ्तार से ब्रेक लगाए कि पीछे से आ रही कार को संभलने का कोई मौका नहीं मिला। कार अनियंत्रित होकर ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई। इस हादसे में पति-पत्नी की मौके पर ही हालत गंभीर हो गई थी। उन्हें उपचार के लिए पनवेल के ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और दोनों की मृत्यु हो गई। इस घटना ने दो मासूम बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठा दिया और उनके भविष्य के सामने एक गहरा संकट खड़ा हो गया।

आठ साल की लंबी कानूनी जंग

इस हादसे के बाद परिवार ने न्याय की गुहार लगाई और मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। आठ साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार 29 अक्टूबर को ट्रिब्यूनल की सदस्य गौरी कावडिकर ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। ट्रिब्यूनल ने पीड़ित परिवार को 1,80,99,232 रुपये का कुल मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह मुआवजा राशि मृतक दंपति की आय और उनके रोजगार के स्तर को आधार बनाकर तय की गई है।

ट्रिब्यूनल ने तय की जिम्मेदारी की सीमा

इस मामले की सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने हादसे के कारणों का बारीकी से विश्लेषण किया। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि सड़क पर किसी भी वाहन को चलाते समय आगे चल रहे वाहनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना चालक का प्राथमिक कर्तव्य है। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल किसी वाहन द्वारा अचानक ब्रेक लगाने से ही पीछे वाले चालक को पूरी तरह दोषी नहीं ठहराया जा सकता। फिर भी, इस विशिष्ट मामले में ट्रिब्यूनल ने अंकित की कार की गति और ट्रक के पीछे बनी दूरी को जांचा।

  • ट्रिब्यूनल ने कार चालक अंकित को हादसे के लिए 70 प्रतिशत जिम्मेदार माना, क्योंकि यदि कार की रफ्तार नियंत्रित होती और पर्याप्त सुरक्षित दूरी होती, तो दुर्घटना टाली जा सकती थी।
  • ट्रक चालक की लापरवाही और असुरक्षित तरीके से ब्रेक लगाने के लिए उसे हादसे के लिए 30 प्रतिशत जिम्मेदार ठहराया गया।

सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि ट्रक चालक की ओर से भी नियमों की अनदेखी हुई थी, लेकिन कार चालक की सतर्कता में कमी को भी नजरअंदाज नहीं किया गया।

मुआवजे की गणना और आधार

मुआवजे की कुल राशि का निर्धारण मृतक दंपति के व्यावसायिक जीवन और उनकी मासिक आय के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। अंकित चुग डेल इंटरनेशनल सर्विसेज जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में सीनियर डिलीवरी स्पेशलिस्ट के पद पर कार्यरत थे, जबकि उनकी पत्नी संजना एक स्कूल में कार्यरत थीं। परिवार को हुए अपूरणीय आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए न्यायाधिकरण ने मुआवजे का विवरण इस प्रकार तय किया है:

  • संजना की मृत्यु के लिए 92,53,500 रुपये निर्धारित किए गए।
  • अंकित चुग की मृत्यु के लिए 88,45,732 रुपये का निर्धारण किया गया।

कुल मिलाकर, ट्रिब्यूनल ने 1,80,99,232 रुपये की धनराशि पीड़ित बच्चों को प्रदान करने का आदेश पारित किया है। हालांकि, यह आर्थिक मदद उन बच्चों के जीवन से गए माता-पिता की कमी को कभी पूरा नहीं कर सकती, लेकिन कानूनी न्याय के रूप में यह उनके भविष्य के लिए एक बड़ी राहत है। यह फैसला उन सभी चालकों के लिए एक सबक है जो एक्सप्रेसवे जैसे तेज रफ्तार मार्गों पर नियमों के प्रति लापरवाही बरतते हैं।

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