खंडवा के 'नगर सेठ' का 92 साल पुराना कारोबारी सफर: कॉटन से शुरू होकर रियल एस्टेट और फाइनेंस तक पहुंचा साम्राज्य, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बनाईं 58 से ज्यादा कॉलोनियां

मध्य प्रदेश के खंडवा में 'नगर सेठ' के नाम से मशहूर राजू चांदमल जैन के परिवार का कारोबारी सफर 92 वर्षों का इतिहास समेटे हुए है। साल 1934 में कॉटन के व्यापार से शुरू हुआ यह सफर आज रियल एस्टेट, शेयर बाजार और एनबीएफसी तक विस्तृत हो चुका है।

व्यापारिक दुनिया में किसी कारोबार को शुरू करना और उसे लगातार सफलता की राह पर बनाए रखना बड़ी चुनौती माना जाता है, लेकिन जब कोई परिवार नौ दशकों से अधिक समय तक अपनी साख और भरोसे को कायम रखे, तो वह मिसाल बन जाता है। मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में 'नगर सेठ' के नाम से मशहूर राजू चांदमल जैन का परिवार इसी अटूट भरोसे और निरंतर विकास की कहानी पेश करता है। 92 साल पहले एक छोटे से कॉटन व्यापार से शुरू हुआ यह सफर आज रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाओं और शेयर बाजार तक फैल चुका है।

इस प्रतिष्ठित कारोबारी घराने का दायरा केवल खंडवा तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों तक विस्तृत हो चुका है। परिवार की नई पीढ़ी के आगमन के साथ कारोबार में आधुनिक दृष्टिकोण और नई तकनीक का समावेश हुआ है। राजू चांदमल जैन के तीनों बेटे शुभम जैन, सोमिल जैन और रचित जैन व्यापार के अलग-अलग मोर्चों को संभालते हुए बुजुर्गों की बनाई साख को आगे बढ़ा रहे हैं।

1934 से शुरुआत: दादाजी हुकुमचंद जैन ने रखी नींव

इस भव्य कारोबारी सफर का इतिहास वर्ष 1934 से शुरू होता है। राजू चांदमल जैन के दादाजी स्वर्गीय हुकुमचंद जैन ने कपास यानी कॉटन के कारोबार की नींव रखी थी। उस जमाने में कॉटन व्यापार में सफलता हासिल करने के लिए भारी शारीरिक परिश्रम, व्यापारिक समझ और बाजार के उतार-चढ़ाव की गहरी परख की आवश्यकता होती थी। स्वर्गीय हुकुमचंद जैन ने अपनी निष्ठा और समझ के बल पर शहर में परिवार की व्यापारिक साख स्थापित की।

दादाजी द्वारा रखी गई इस मजबूत नींव को अगली पीढ़ी ने पूरी लगन के साथ आगे बढ़ाया। वर्ष 1952 में राजू जैन के पिता स्वर्गीय चांदमल जैन ने कॉटन व्यापार के साथ-साथ फाइनेंस यानी वित्तीय गतिविधियों की शुरुआत की। इस पूरे दौर में उनकी माता स्वर्गीय पदमावती जैन का भी बड़ा सहयोग रहा। वर्ष 1960 में दादाजी हुकुमचंद जैन का निधन हो गया, लेकिन परिवार ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद व्यापारिक परंपरा को टूटने नहीं दिया और निष्ठा के साथ काम जारी रखा।

1984 में राजू चांदमल जैन ने संभाली कमान, शुरू हुआ नया विस्तार

समय बदलने के साथ कारोबार के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया। वर्ष 1984 में राजू चांदमल जैन ने खुद परिवार के कारोबार की बागडोर अपने हाथों में ली। उन्होंने परंपरागत कॉटन और फाइनेंस के काम को न केवल मजबूती से संभाला, बल्कि नए क्षेत्रों में नए अवसरों को खोजना भी शुरू किया। अपने व्यापक अनुभव के दम पर उन्होंने परिवार के व्यवसाय को शेयर बाजार और रियल एस्टेट जैसे उभरते क्षेत्रों की ओर मोड़ा।

राजू जैन बताते हैं कि परिवार के प्रत्येक सदस्य के सहयोग और बदलते समय के अनुरूप ढलने की क्षमता के कारण ही उनका व्यापार एक नई ऊंचाई पर पहुंच सका। उन्होंने एक ओर जहां पुराने कॉटन व्यवसाय को पूरी निष्ठा से आगे बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर नए व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रवेश कर अपनी अलग पहचान कायम की।

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में 58 से ज्यादा कॉलोनियों का निर्माण

रियल एस्टेट के क्षेत्र में परिवार का प्रवेश काफी योजनाबद्ध तरीके से हुआ। राजू जैन के अनुसार, वर्ष 2020 में उन्होंने अपनी पहली आवासीय कॉलोनी विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया था। इसके बाद से रियल एस्टेट सेक्टर में परिवार का काम तेजी से आगे बढ़ता गया।

आज स्थिति यह है कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मिलाकर इस कारोबारी परिवार द्वारा 58 से ज्यादा कॉलोनियां विकसित की जा चुकी हैं। इसके अलावा, कई प्रमुख स्थानों पर निर्माण और विकास कार्य तेजी से जारी हैं। कॉटन और फाइनेंस से शुरू हुआ यह व्यावसायिक दायरा अब जमीन, आवासीय प्रोजेक्ट्स और बड़े कंस्ट्रक्शन कार्यों तक विस्तृत हो चुका है।

व्यवसाय में उतरी नई पीढ़ी: सीए और सीएफए बेटों ने संभाला मोर्चा

कारोबार को समय के साथ आधुनिक और पेशेवर बनाने में राजू चांदमल जैन के तीनों बेटों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। नई पीढ़ी के जुड़ने से व्यापार को नई दिशा और गति मिली है:

  • शुभम जैन: वर्ष 2012 में कारोबार में शामिल हुए और व्यावसायिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।
  • सोमिल जैन: राजू जैन के बड़े बेटे सोमिल जैन वर्ष 2015 में व्यवसाय से जुड़े। सोमिल जैन एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं और वे वित्तीय व रणनीतिक फैसलों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
  • रचित जैन: छोटे बेटे रचित जैन वर्ष 2024 में परिवार के व्यवसाय में शामिल हुए। उन्होंने CFA की उच्च शिक्षा प्राप्त की है और वे आधुनिक वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

राजू चांदमल जैन का कहना है कि वे स्वयं भी आज कारोबार में पूरी तरह से सक्रिय रहते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परिवार की पुरानी विश्वसनीयता बनी रहे और उनके बेटे आधुनिक युग की जरूरतों के अनुसार व्यापार का विस्तार करते रहें।

रिजर्व बैंक से लाइसेंस और एनबीएफसी का गठन

पारंपरिक फाइनेंस के काम को नया और संस्थागत स्वरूप देने के लिए परिवार ने भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस प्राप्त किया। इसके तहत एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) का गठन किया गया, जिसे CH प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित किया जा रहा है।

वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में काम करने के लिए रिजर्व बैंक के कड़े नियमों और दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है। राजू जैन का मानना है कि व्यापार में केवल मुनाफा कमाना ही सब कुछ नहीं होता, बल्कि नियमों का पालन करते हुए बाजार और ग्राहकों के बीच विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है।

आखिर क्यों कहलाते हैं 'नगर सेठ'?

खंडवा शहर में राजू चांदमल जैन और उनके परिवार को लोग बड़े आदर के साथ 'नगर सेठ' कहकर संबोधित करते हैं। राजू जैन बताते हैं कि यह कोई आधिकारिक या सरकारी पदवी नहीं है, बल्कि खंडवा के निवासियों द्वारा उनके परिवार को वर्षों के भरोसे और सेवा के बदले दिया गया एक अनमोल सम्मान है।

परिवार की कई पीढ़ियों ने न केवल मेहनत से कारोबार खड़ा किया, बल्कि सामाजिक सरोकारों और जनकल्याण के कार्यों में भी हमेशा बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसी वजह से आम लोगों के बीच यह आदरसूचक नाम लोकप्रिय हुआ। राजू जैन इस सम्मान का श्रेय अपने बुजुर्गों की तपस्या और ईमानदारी को देते हैं।

व्यापार के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन

बिजनेस की व्यस्तताओं के बीच भी राजू चांदमल जैन सामाजिक और व्यापारिक संगठनों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे वर्तमान में मध्य प्रदेश कॉटन संगठन के अध्यक्ष हैं और ऑल इंडिया कॉटन एसोसिएशन में निदेशक के पद पर भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी व्यवसायी की असली साख केवल धन कमाने से तय नहीं होती, बल्कि लंबे समय तक ईमानदारी से काम करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने से बनती है।

'यह खंडवा और प्रदेश की जनता का प्यार है'

CH ग्रुप के निदेशक शुभम जैन का कहना है कि उनके परिवार को मिली यह सफलता खंडवा और पूरे मध्य प्रदेश के लोगों के अटूट विश्वास का परिणाम है। वे इसे जनता का प्यार मानते हैं।

शुभम जैन के अनुसार, 92 साल पहले उनके परदादा द्वारा बोया गया कॉटन व्यापार रूपी छोटा सा पौधा आज एक वटवृक्ष बन चुका है। परिवार की नई पीढ़ी के रूप में उनका यह संकल्प है कि वे बुजुर्गों द्वारा दी गई इस विरासत और जनता के विश्वास को अक्षुण्ण रखते हुए कारोबार को सफलता की नई बुलंदियों तक ले जाएं।

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