मुंबई के बुनियादी ढांचे में नया अध्याय
मुंबई और इसके आसपास के इलाकों को जाम की समस्या से स्थायी रूप से निजात दिलाने के लिए एक नई और बड़ी सी-लिंक परियोजना की रूपरेखा तैयार की गई है। महाराष्ट्र मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी एमएमआरडीए ने उत्तान से विरार तक एक विशाल सी-लिंक बनाने का फैसला किया है। यह प्रोजेक्ट न केवल तकनीकी रूप से उन्नत होगा, बल्कि मुंबई की कनेक्टिविटी को पूरी तरह से बदल देगा। वर्तमान में जो दूरी तय करने में यात्रियों को 2 से 3 घंटे का समय लगता है, इस सी-लिंक के बनने के बाद वह मात्र 45 मिनट में सिमट जाएगी।
प्रोजेक्ट का स्वरूप और लंबाई
इस निर्माणाधीन सी-लिंक की कुल लंबाई 55.12 किलोमीटर निर्धारित की गई है। इस विशाल परियोजना को दो मुख्य भागों में बांटा गया है। इसमें से समंदर के ऊपर बनने वाला मुख्य पुल करीब 24.35 किलोमीटर लंबा होगा, जबकि विभिन्न स्थानों को जोड़ने वाले कनेक्टर्स की कुल लंबाई 30.77 किलोमीटर होगी। इन कनेक्टर्स का विवरण इस प्रकार है:
- उत्तान के लिए 9.32 किलोमीटर लंबा कनेक्टर।
- वसई के लिए 2.5 किलोमीटर का कनेक्टर।
- विरार के लिए सबसे लंबा, यानी 18.95 किलोमीटर का कनेक्टर।
जमीन अधिग्रहण और कनेक्टिविटी
एमएमआरडीए ने इस परियोजना के लिए जमीनी स्तर पर काम तेज कर दिया है। वर्तमान में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। पूरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 104.28 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है, जिसमें से 20.2 हेक्टेयर जमीन उत्तान के निकट चिह्नित कर ली गई है। यहां एक कनेक्टर का निर्माण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का रणनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह वर्सोवा-भयंदर कोस्टल रोड से जुड़ने के साथ-साथ सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक पहुंच प्रदान करेगा। विरार में बनने वाला सबसे लंबा 18.95 किलोमीटर का कनेक्टर इसे एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा, जो आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगा।
यातायात और लॉजिस्टिक लाभ
इस सी-लिंक के पूरा होने से मरीन ड्राइव से विरार तक का रास्ता पूरी तरह सिग्नल फ्री हो जाएगा। अभी मरीन ड्राइव से विरार तक की करीब 75 किलोमीटर की दूरी तय करना एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, यह मार्ग वाधवान डीप सी पोर्ट से भी जुड़ा होगा, जिससे सामानों की आवाजाही में काफी सहूलियत होगी। इस 6 लेन वाले सी-लिंक को पूरी तरह से एक्सेस कंट्रोल्ड और अत्याधुनिक नेविगेशन सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
लागत और समय सीमा
इस भव्य परियोजना की अनुमानित लागत 58,754.71 करोड़ रुपये आंकी गई है। प्राधिकरण ने इसके पहले चरण को साल 2030 तक पूरा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। भविष्य में इस रूट को और अधिक विस्तार देकर वाधवान पोर्ट और देश के मुख्य राजमार्गों से मजबूती से जोड़ने की योजना है। यह मार्ग भयंदर के उत्तान से शुरू होकर समंदर के रास्ते वसई क्रीक को पार करेगा और अंत में पालघर जिले के विरार में समाप्त होगा। इससे वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर वाहनों का दबाव काफी कम हो जाएगा और नरीमन पॉइंट से विरार तक की यात्रा बेहद सुगम हो जाएगी। विशेष रूप से भयंदर से विरार का सफर तो मात्र 15 मिनट में तय किया जा सकेगा।
मुंबई में सी-लिंक का विस्तार
मुंबई में समुद्री पुलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में दो प्रमुख पुल पहले से मौजूद हैं और दो अन्य पर काम चल रहा है। सबसे चर्चित अटल सेतु की लंबाई 21.8 किलोमीटर है, जिसमें से 16.5 किलोमीटर हिस्सा समंदर पर है, जो दक्षिण मुंबई को नवी मुंबई से जोड़ता है। इसके अलावा बांद्रा-वरली सी-लिंक 5.6 किलोमीटर का केबल ब्रिज है। आने वाले समय में वर्सोवा-बांद्रा सी-लिंक और उत्तान-विरार सी-लिंक के साथ मुंबई में कुल 4 बड़े समुद्री ब्रिज यातायात का मुख्य आधार बन जाएंगे। इससे पूरा कोस्टल रिंग मार्ग बनकर तैयार हो जाएगा, जो शहर की लाइफलाइन के रूप में काम करेगा।
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