20 दिन की पैरोल खत्म होने के बाद बढ़ा विवाद
नाबालिग गुरुकुल छात्रा के साथ यौन शोषण के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे आसाराम पर कानूनी शिकंजा और कस गया है। 20 दिन की पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद भी नियत समय पर जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण न करने की वजह से उनके खिलाफ औपचारिक मामला दर्ज कर लिया गया है। समय पर जेल वापस न लौटने के कारण अब उन पर कानून का कड़ा रुख देखने को मिल रहा है।
रातानाड़ा थाने में दर्ज हुआ केस, जेल प्रहरी ने दी रिपोर्ट
आसाराम द्वारा निर्धारित समय सीमा में सरेंडर न करने के मामले में जोधपुर के रातानाड़ा थाना में मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई जेल प्रशासन के निर्देशों के आधार पर की गई है। जेल प्रहरी बनवारीलाल द्वारा पेश की गई लिखित रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने राजस्थान कारागार अधिनियम की धारा 58 (ख) के अंतर्गत प्रकरण पंजीकृत किया है। कानूनी मानकों के अनुसार, तय समय में वापस न आने पर वे अब भगोड़ा घोषित किए जाने की श्रेणी में आ गए हैं और पुलिस उनकी औपचारिक तलाश में जुट गई है।
देर रात 11 बजे पहुंचे, सूर्यास्त के नियम के कारण नहीं मिला प्रवेश
यह पूरा मामला सोमवार देर रात का है, जब आसाराम की पैरोल की मियाद पूरी हो रही थी। वे मध्य प्रदेश के इंदौर से एयर एंबुलेंस के जरिए जोधपुर पहुंचे थे। हवाई अड्डे से उन्हें सीधे जोधपुर सेंट्रल जेल ले जाया गया, लेकिन जब वे वहां पहुंचे तब रात के 11 बज चुके थे।
जेल मैनुअल और जेल अधीक्षक के स्थापित नियमों के अनुसार बंदियों को केवल सूर्यास्त से पहले ही जेल परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जाती है। निर्धारित समय सीमा समाप्त हो जाने के कारण जेल प्रशासन ने मुख्य दरवाजे बंद रखे और देर रात उन्हें अंदर लेने से साफ इनकार कर दिया।
एंबुलेंस से वापस लौटे, जेल के बाहर पहुंचे कई समर्थक
जेल में प्रवेश की इजाजत न मिलने के बाद आसाराम को देर रात ही एंबुलेंस से वापस लौटना पड़ा। इस दौरान जेल के मुख्य द्वार के बाहर उनके समर्थकों और भक्तों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए ताकि इलाके में शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
3 साल तक की अतिरिक्त सजा और जुर्माने का प्रावधान
रातानाड़ा थाने में दर्ज इस मुकदमे के कारण आसाराम की कानूनी परेशानियां और अधिक बढ़ सकती हैं। इस धारा के अंतर्गत निम्नलिखित मुख्य प्रावधान शामिल हैं:
- बिना वारंट गिरफ्तारी: इस गैर-जमानती धारा में पुलिस को आरोपी को बिना वारंट के गिरफ्तार करने का पूरा अधिकार रहता है।
- अतिरिक्त कारावास: अपराध साबित होने पर आरोपी को 3 वर्ष तक की अतिरिक्त जेल की सजा दी जा सकती है।
- आर्थिक दंड: जेल की सजा के साथ-साथ 3000 रुपये तक का आर्थिक दंड लगाने की व्यवस्था भी कानून में है।
ऊपरी अदालतों की अर्जियों पर पड़ेगा प्रतिकूल प्रभाव
समय पर जेल में सरेंडर न करने और नया केस दर्ज होने का सीधा असर आसाराम की आने वाली कानूनी अर्जियों पर पड़ेगा। वे समय-समय पर राजस्थान हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर जमानत और पैरोल की याचिकाएं दाखिल करते रहे हैं। हालांकि, इस घटनाक्रम के बाद ऊपरी अदालतों में उनकी ओर से पेश की जाने वाली याचिकाओं पर नकारात्मक असर पड़ना तय माना जा रहा है, जिससे भविष्य में उनके लिए पैरोल या अन्य कानूनी राहत पाना बहुत कठिन हो जाएगा।
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