सफलता की नई इबारत
राजस्थान के जयपुर जिले के सखून गांव के रहने वाले पैरा-एथलीट महेंद्र गुर्जर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है। जापान के आइची-नागोया में संपन्न हुए एशियन पैरा गेम्स में महेंद्र ने भाला फेंक प्रतियोगिता की F42 श्रेणी में 59.03 मीटर का थ्रो करके रजत पदक हासिल किया है। इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे शारीरिक बाधाएं भी छोटी पड़ जाती हैं।
संघर्ष और प्रेरणा
महेंद्र गुर्जर का जीवन संघर्षों और हौसले की कहानी है। बचपन से ही पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। एक साधारण किसान परिवार में पले-बढ़े महेंद्र ने अपनी खेल यात्रा की शुरुआत कॉलेज के दिनों से की थी। उन्होंने बहुत ही कम समय में अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार स्वर्ण और रजत पदक जीतकर अपनी धाक जमाई है।
विश्व रिकॉर्ड और अगला लक्ष्य
महेंद्र गुर्जर की ख्याति केवल इसी पदक तक सीमित नहीं है। इससे पहले वे स्विट्जरलैंड ग्रैंड प्रिक्स में 61.17 मीटर का शानदार थ्रो फेंककर विश्व रिकॉर्ड भी बना चुके हैं। अपनी हालिया सफलता के बाद अब उनकी नजरें और ऊंची हो गई हैं। वे अब पूरी तरह से वर्ष 2028 में होने वाले लॉस एंजिल्स पैरालंपिक खेलों की तैयारियों में जुट गए हैं। उनका एकमात्र सपना इन खेलों में देश के लिए पदक जीतना है।
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