उत्तर कोरिया का नया सैन्य प्रदर्शन
कोरियाई प्रायद्वीप में एक बार फिर तनाव की स्थिति बनती दिख रही है। ताजा घटनाक्रम में, उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की सीमा के निकट अपनी सैन्य उपस्थिति और हथियारों का प्रदर्शन तेज कर दिया है। विसैन्यीकृत क्षेत्र यानी DMZ के पास उत्तर कोरियाई सेना की गतिविधियों में अचानक तेजी देखी गई है, जहां तीन बख्तरबंद तोपें तैनात की गई हैं। इन तोपों का रुख सीधे दक्षिण कोरिया की दिशा में है, जिससे क्षेत्र में हलचल मच गई है।
सीमा पर दिखी 122 मिमी की खतरनाक तोपें
सीमा की निगरानी कर रहे दक्षिण कोरियाई केंद्रों से ली गई तस्वीरों में उत्तर कोरियाई सैन्य हलचल स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। शुक्रवार तक जहां सीमा पर केवल एक बख्तरबंद वाहन दिखाई दे रहा था, वहीं सोमवार तक इनकी संख्या बढ़कर तीन हो गई है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें से एक प्रमुख हथियार 122 मिमी की सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोप है।
यह आर्टिलरी सिस्टम काफी पुराना माना जाता है, जिसे संभवतः 1970 के दशक के अंतिम वर्षों में उत्तर कोरियाई सेना में शामिल किया गया था। इस तोप की मारक क्षमता करीब 24 किमी या लगभग 15 मील बताई जा रही है। इसकी जद में दक्षिण कोरिया का जिम्पो शहर भी आता है, जो सीमा पर कड़ी निगरानी रखने वाला एक महत्वपूर्ण इलाका है। हालांकि, तकनीकी रूप से यह उत्तर कोरिया के आधुनिक हथियारों के मुकाबले कम शक्तिशाली है, लेकिन इसकी तैनाती ने दक्षिण कोरिया के लिए चिंताएं बढ़ा दी हैं।
DMZ में सैनिकों की बाड़बंदी
सिर्फ तोपों की तैनाती ही नहीं, बल्कि करीब 30 उत्तर कोरियाई सैनिक भी विवादित सीमा क्षेत्र में बाड़ लगाने और निर्माण कार्य में व्यस्त देखे गए हैं। यह गतिविधि ऐसे समय पर हुई है जब दोनों देशों के नेताओं की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ तीखे और भड़काऊ बयान दिए जा रहे हैं। सीमा पर बाड़ लगाने की इस प्रक्रिया को विशेषज्ञ दोनों देशों के बीच बढ़ती दूरी और सैन्य तनाव के रूप में देख रहे हैं।
क्या यह सिर्फ दिखावा है या युद्ध की तैयारी?
सियोल स्थित आसन इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज के सैन्य विशेषज्ञ यांग उक का मानना है कि इन हथियारों की तैनाती को बहुत बड़े सैन्य बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, उत्तर कोरिया ने इन तोपों को जानबूझकर ऐसी खुली जगह पर रखा है जहां से ये आसानी से दिखाई दें। यह पूरी तरह से अपनी ताकत को प्रदर्शित करने और दक्षिण कोरियाई पक्ष में मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति लगती है।
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रवक्ता जांग दो-यंग ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि हालांकि उत्तर कोरिया अपने हालिया बयानों में नए हथियार सिस्टम का दावा कर रहा है, लेकिन फिलहाल सीमा पर देखी गई तोपों को सेना किसी 'नए हथियार प्रणाली' की श्रेणी में नहीं रखती है।
पर्यटकों और स्थानीय निवासियों में चिंता
तनाव के बावजूद, DMZ पर्यटकों के लिए अब भी खुला है और बड़ी संख्या में लोग यहाँ आते हैं। एगीबोंग ऑब्जर्वेटरी से उत्तर कोरिया का काएफुंग क्षेत्र मात्र 1.2 किमी की दूरी पर है। वियतनाम युद्ध में लड़ चुके 83 साल के जंग गिल-सियोंग ने इन तोपों को अपनी आंखों से देखकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि टीवी पर तोपों के बारे में खबरें देखना अलग बात है, लेकिन उन्हें वास्तविक सीमा पर खड़े देखना डरावना है और यह सोचने पर मजबूर करता है कि भविष्य में हालात क्या करवट लेंगे।
वहां मौजूद पर्यटकों पर भी इसका प्रभाव साफ दिख रहा है। कनाडा से आई 28 साल की हन्ना रॉबिंस ने बताया कि जब उनके टूर गाइड ने वेधशाला पर तोपों की जानकारी दी, तो पूरा समूह डर गया था। गाइड ने उन्हें आश्वस्त करने की कोशिश की कि उत्तर कोरिया गोलीबारी नहीं करेगा, लेकिन इस आश्वासन के बाद भी पर्यटकों के मन में सुरक्षा को लेकर संशय बना हुआ है।
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