वैश्विक बाजार में बिहार के मखाने की बढ़ती मांग
बिहार के पश्चिम चंपारण जिले ने कृषि क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले के बैरिया प्रखंड के रहने वाले 28 वर्षीय युवा किसान रंजीत चौधरी ने अपने प्रयासों से स्थानीय मखाने को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। जिस मखाने को हम और आप भारत के बाजारों में ₹1,000 से ₹1,400 प्रति किलो के भाव पर खरीदते हैं, वही मखाना विदेश में बेहद प्रीमियम कीमत पर बेचा जा रहा है। रंजीत चौधरी ने न केवल मखाने की खेती को आधुनिक रूप दिया है, बल्कि इसे अर्जेंटीना, कनाडा, नेपाल और अफगानिस्तान जैसे देशों तक सफलतापूर्वक निर्यात करना भी शुरू किया है।
भारत बनाम विदेशी बाजार में मखाने की कीमत
रंजीत चौधरी के अनुसार, भारत के अलग-अलग राज्यों में मखाने की कीमत सामान्य तौर पर ₹1,000 से ₹1,400 प्रति किलो के बीच रहती है, जो कुछ स्थानों पर ₹1,600 प्रति किलो तक पहुंच जाती है। हालांकि, जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजारों का अध्ययन किया, तो उन्हें आश्चर्यजनक आंकड़े मिले। रंजीत ने बताया कि विदेशों में सुपरफूड के रूप में पहचाने जाने वाले इस मखाने की कीमत ₹4,000 से लेकर ₹12,000 प्रति किलो तक है। उन्होंने विदेशों में खेप भेजने से पहले वहां के ऑनलाइन बाजार का गहन विश्लेषण किया था, जिससे उन्हें इन ऊंचे दामों की जानकारी मिली।
निर्यात के नए आयाम
रंजीत चौधरी की मेहनत रंग ला रही है और वे लगातार अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर पूरे कर रहे हैं। उनके निर्यात के आंकड़ों पर नजर डालें तो उपलब्धियां स्पष्ट दिखाई देती हैं:
- नेपाल से उन्हें 2,000 किलो मखाने का बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ था, जिसे उन्होंने सफलतापूर्ण पूरा किया।
- कनाडा के बाजार में उन्होंने 100 किलो मखाने का निर्यात किया है।
- अर्जेंटीना जैसे दक्षिण अमेरिकी देश में भी उन्होंने 20 किलो मखाना सैंपल के तौर पर भेजा है।
- अफगानिस्तान में भी बिहार के इस मखाने की मांग देखी गई है।
कीमतों का गणित और विदेशी लोगों की पसंद
रंजीत का अनुभव बताता है कि विदेशों में मखाने के प्रति लोगों का आकर्षण काफी अधिक है। उनके शोध के अनुसार, कनाडा में कच्चे मखाने की कीमत ₹12,000 प्रति किलो तक देखी गई। वहीं, अर्जेंटीना में इसकी कीमत ₹5,000 से ₹6,000 प्रति किलो के बीच है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी मखाना ₹4,000 से ₹5,000 प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है। महंगी दरों के बावजूद, विदेशी नागरिक इसके स्वास्थ्य लाभों और पोषक तत्वों के कारण इसे काफी चाव से खरीद रहे हैं। चंपारण के किसान का यह साहस न केवल उनके लिए बल्कि बिहार के अन्य किसानों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण पेश कर रहा है कि कैसे सही रणनीति से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर सराहा जा सकता है।
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