जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) की जानकारी के मुताबिक रविवार की देर रात भूटान में 5.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसके झटके पूर्वोत्तर भारत के साथ-साथ बांग्लादेश, नेपाल और चीन के कुछ इलाकों तक महसूस किए गए। भारतीय समयानुसार यह भूकंप रात करीब 11:06 बजे भूटान के पुनाखा के नजदीक आया। एंड्रॉइड भूकंप चेतावनी प्रणाली के अनुसार इसकी तीव्रता लगभग 5.6 आंकी गई। भूकंप का केंद्र असम के कुछ हिस्सों से करीब 252 किलोमीटर की दूरी पर था और असम तथा मेघालय समेत कई पूर्वोत्तर राज्यों में इसके झटके साफ महसूस किए गए।
भारत के कई राज्यों में महसूस हुए झटके
पूर्वोत्तर भारत के कई क्षेत्रों में भूकंप के झटके महसूस होने की पुष्टि हुई है। झटके लगने के बाद कुछ लोग एहतियातन अपने घरों से बाहर निकल आए। इस इलाके के कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने भी भूकंप महसूस करने की बात साझा की। राहत की बात यह रही कि तत्काल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई है, और अधिकारी अब भी हालात का आकलन कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि भूटान भूकंपीय दृष्टि से बेहद सक्रिय हिमालयी क्षेत्र में आता है, जहां भारतीय और यूरेशियन विवर्तनिक प्लेटें लगातार आपस में टकराती रहती हैं, जिससे यह इलाका अक्सर भूकंप की चपेट में रहता है।
आखिर भूकंप क्यों आते हैं?
बीते कुछ समय में देश और दुनिया के कई हिस्सों में भूकंप की घटनाएं बढ़ती दिख रही हैं। हमारी धरती के भीतर कुल 7 टेक्टोनिक प्लेट्स मौजूद हैं, जो निरंतर अपनी जगह पर घूमती रहती हैं। कई बार इन प्लेटों में आपस में टकराव या घर्षण हो जाता है, और यही टकराव धरती पर भूकंप का कारण बनता है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है, क्योंकि भूकंप के दौरान इमारतें ढह जाती हैं और मलबे में दबकर हजारों लोगों की जान चली जाती है।
भारत में भूकंप के कौन-कौन से जोन हैं
भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार भारत का करीब 59 फीसदी भूभाग भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। वैज्ञानिकों ने देश को भूकंप के नजरिए से जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5 यानी 4 हिस्सों में बांटा है। इनमें जोन-5 के इलाके सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं, जबकि जोन-2 सबसे कम संवेदनशील है। देश की राजधानी दिल्ली जोन-4 में आती है, जहां 7 से अधिक तीव्रता के भूकंप तक आ सकते हैं और इससे भारी तबाही मच सकती है। हिमालयी क्षेत्र और कच्छ व पूर्वोत्तर भारत जैसी कुछ फॉल्ट लाइनों की वजह से देश में भूकंप का खतरा अधिक रहता है, क्योंकि भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है।
रिक्टर स्केल पर तीव्रता का असर
भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है। इस पैमाने पर 4 से 4.9 तीव्रता वाले भूकंप में घर में रखा सामान अपनी जगह से गिर सकता है। 5 से 5.9 तीव्रता में भारी सामान और फर्नीचर तक हिलने लगता है। 6 से 6.9 तीव्रता में इमारत का आधार दरक सकता है, जबकि 7 से 7.9 तीव्रता में इमारतें ढह जाती हैं। 8 से 8.9 तीव्रता पर सुनामी का खतरा बढ़ जाता है और बड़ी तबाही होती है, वहीं 9 या इससे अधिक तीव्रता में सबसे भीषण विनाश देखने को मिलता है।
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