दिव्यांगजनों और बुजुर्गों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
समाज के दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को सुगम और स्वावलंबी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है। इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को आधुनिक सहायता उपकरण उपलब्ध कराना है, जिन्हें बढ़ती उम्र या शारीरिक दिव्यांगता के कारण दैनिक गतिविधियों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस सामाजिक प्रयास के लिए भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम यानी एएलआईएमसीओ और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड यानी एचयूआरएल के बीच एक औपचारिक समझौते पर मुहर लगी है। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 7 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी, जिसे दोनों संस्थाओं द्वारा सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के अंतर्गत कार्यान्वित किया जाएगा।
गोरखपुर, बरौनी और सिंदरी बनेंगे केंद्र
इस महत्वाकांक्षी योजना का दायरा तीन प्रमुख स्थानों तक विस्तृत होगा। प्रोजेक्ट की शुरुआत उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित प्रधानमंत्री दिव्याशा वयोश्री केंद्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने से होगी। इसके अतिरिक्त, बिहार के बरौनी और झारखंड के सिंदरी में विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों का मुख्य कार्य जरूरतमंद दिव्यांगों और बुजुर्गों तक उनकी शारीरिक आवश्यकता के अनुसार आधुनिक उपकरण पहुँचाना होगा। इस पूरे अभियान में एचयूआरएल अपनी सीएसआर निधि से 7 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण योगदान देगा। इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के दौरान एएलआईएमसीओ के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) और एचयूआरएल के मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) समेत दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
जरूरत के अनुसार मिलेंगे खास उपकरण
यह योजना हर व्यक्ति की व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। किसी भी व्यक्ति को रैंडम आधार पर उपकरण नहीं दिए जाएंगे। सबसे पहले पात्र लाभार्थियों की पहचान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसमें उनकी शारीरिक स्थिति का गहन आकलन होगा और सभी आवश्यक दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाएगी। एक बार पात्रता सिद्ध होने के बाद, उन्हें उनकी विशिष्ट जरूरतों के आधार पर उपकरण वितरित किए जाएंगे।
इस वितरण सूची में निम्नलिखित प्रमुख साधन शामिल हैं:
- कृत्रिम अंग (आर्टिफिशियल लिम्ब्स)
- व्हीलचेयर
- सुनने की मशीन (हियरिंग एड्स)
- ऑर्थोसिस उपकरण, जो प्रभावित अंगों को आवश्यक सहारा प्रदान करते हैं
यदि किसी लाभार्थी को किसी विशिष्ट या कस्टमाइज्ड उपकरण की आवश्यकता होती है, तो उसमें आवश्यक बदलाव भी किए जाएंगे ताकि उपयोग करने वाले व्यक्ति को अधिकतम सुविधा मिल सके। इन उपकरणों को विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वे व्यक्ति की शारीरिक बनावट के अनुकूल हों और उनके दैनिक जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा न डालें।
उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव की सुविधा
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल उपकरण बांटने तक सीमित नहीं है। एएलआईएमसीओ और एचयूआरएल ने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि लाभार्थियों को लंबे समय तक सहायता मिले। कई बार उपकरण मिलने के बाद उनके खराब होने या उनमें तकनीकी खामियां आने पर उपयोगकर्ता असहाय महसूस करते हैं। इसे देखते हुए, इस योजना में उपकरणों के रखरखाव और बाद की सर्विस (आफ्टर सेल्स सर्विस) की भी व्यवस्था की गई है। यदि किसी उपकरण में कोई टूट-फूट होती है या मरम्मत की आवश्यकता पड़ती है, तो संबंधित एजेंसियां उसे ठीक करने में पूरी मदद करेंगी। इसका मूल उद्देश्य यह है कि दिव्यांगों और बुजुर्गों को बार-बार नई व्यवस्था के लिए न भटकना पड़े और उन्हें मिले संसाधन लंबे समय तक कारगर साबित हों।
कैसे होगा लाभार्थियों का चयन?
योजना का लाभ लेने के लिए एक पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। लाभार्थियों के चयन के लिए जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की एक समन्वय टीम बनाई जाएगी। ये टीमें सीधे तौर पर जमीनी स्तर पर काम करेंगी। सबसे पहले उन लोगों को चिन्हित किया जाएगा जिन्हें उपकरणों की सबसे अधिक आवश्यकता है। उसके बाद, निर्धारित मानदंडों के आधार पर दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के बाद ही शिविरों के माध्यम से उपकरण वितरित किए जाएंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी और सीएसआर फंड का लाभ सही और जरूरतमंद व्यक्ति तक ही पहुंचे।
आत्मविश्वास बढ़ाना ही असली मकसद
इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम पहलू दिव्यांगजनों और बुजुर्गों का खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लाना है। जब एक व्यक्ति खुद अपनी व्हीलचेयर चलाकर या कृत्रिम अंगों के सहारे अपने रोजमर्रा के काम कर पाता है, तो उसकी दूसरों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाती है। एएलआईएमसीओ और एचयूआरएल का मानना है कि इन उपकरणों के मिलने से न केवल उनके चलने-फिरने की समस्या हल होगी, बल्कि समाज में उनकी सक्रिय भागीदारी भी बढ़ेगी। एक आत्मनिर्भर जीवन शैली उन्हें मानसिक रूप से मजबूती प्रदान करेगी और वे सम्मान के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सकेंगे। यह पहल समाज के उन उपेक्षित वर्गों के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आई है, जो अपनी शारीरिक सीमाओं के कारण अब तक सीमित जीवन जीने को मजबूर थे।
https://hindi.news18.com/news/nation/divyang-and-elderly-supportive-equipments-7-crore-mou-alimco-hurl-10919281.html