पवन सिंह और ज्योति सिंह के तलाक का विवाद: कोर्ट का 3,000 रुपये का जुर्माना और सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी

भोजपुरी स्टार पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच तलाक का मामला बलिया कोर्ट में सुनवाई के दौरान फिर चर्चा में आ गया है, जहां पेश न होने पर अभिनेता पर जुर्माना लगाया गया है। ज्योति सिंह ने साफ किया है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगी।

बलिया कोर्ट में पवन सिंह की अनुपस्थिति पर नाराजगी

भोजपुरी सिनेमा के चहेते कलाकार और भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी पवन सिंह का निजी जीवन एक बार फिर कानूनी उलझनों के घेरे में है। लंबे समय से चल रहे उनके और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच के वैवाहिक विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। हाल ही में बलिया की एक अदालत में इस तलाक के मामले को लेकर सुनवाई निर्धारित की गई थी, जिसमें पवन सिंह की उपस्थिति अनिवार्य थी। हालांकि, अभिनेता और राजनेता पवन सिंह अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके चलते अदालत ने उन पर सख्त रुख अपनाते हुए 3,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया है।

ज्योति सिंह का बयान और सुलह की इच्छा

इस पूरी सुनवाई के दौरान ज्योति सिंह स्वयं बलिया कोर्ट में मौजूद थीं। अपने पति का घंटों इंतजार करने के बाद जब वह कोर्ट पहुंचीं, तो उन्होंने मीडिया और अदालत के सामने खुलकर अपनी बात रखी। ज्योति सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अब भी पवन सिंह के साथ अपने रिश्ते को सुधारने और उनके साथ मान-सम्मान के साथ रहना चाहती हैं। उनका कहना है कि वे इस विवाह को बचाने की पूरी कोशिश कर रही हैं।

ज्योति सिंह ने पवन सिंह पर कोर्ट की कार्यवाही को गंभीरता से न लेने का आरोप भी लगाया। उन्होंने आगे कहा कि पवन सिंह बार-बार कोर्ट में पेश होने से बच रहे हैं, जिससे ऐसा लगता है जैसे वे कानून का मजाक बना रहे हैं। ज्योति सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा, 'वह फिर से कोर्ट में नहीं आए। 12 नवंबर को अगली सुनवाई में देखते हैं। वह हर चीज को समझते हैं कि उनके हाथ में है। मैं साथ रहना चाहती हूं, नहीं तो सुप्रीम कोर्ट जाऊंगी।'

कानूनी विकल्प और भरण-पोषण की मांग

न्यायालय में अपनी बात रखते हुए ज्योति सिंह ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि उनके और पवन सिंह के बीच सुलह की कोई गुंजाइश नहीं बचती है, तो वे कानूनी प्रावधानों के तहत अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर उन्हें उनके पति के साथ नहीं रहने दिया जाता, तो वे कानून के अनुसार उचित भरण-पोषण और हर्जाना पाने की हकदार हैं। ज्योति सिंह ने अपने कड़े तेवर दिखाते हुए यह भी स्पष्ट किया कि यदि बलिया की स्थानीय अदालत में उन्हें अपेक्षित न्याय नहीं मिलता है, तो वे इंसाफ पाने के लिए देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगी।

चार-पांच साल पुराना विवाद और राजनीतिक पृष्ठभूमि

पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच तलाक का यह कानूनी संघर्ष लगभग 4-5 सालों से चल रहा है। यह मामला भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री से लेकर बिहार की राजनीति तक चर्चा का विषय बना हुआ है। शुरुआत में दोनों के बीच सब कुछ ठीक होने की खबरें भी सामने आई थीं, खासकर 2024 के लोकसभा चुनाव के समय जब ज्योति सिंह ने काराकाट में अपने पति पवन सिंह के चुनाव प्रचार में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। उस समय उम्मीद जगी थी कि शायद दोनों के बीच दूरियां मिट जाएंगी। लेकिन चुनाव परिणाम के बाद और पवन सिंह की हार के बाद, एक बार फिर से दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं और मामला कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया।

भविष्य को लेकर अनिश्चितता

चूंकि पवन सिंह एक बड़े सेलिब्रिटी होने के साथ-साथ एक राजनीतिक पदाधिकारी (बीजेपी एमएलसी) भी हैं, इसलिए उनके निजी जीवन की यह उथल-पुथल अक्सर विरोधी दलों के लिए भी चर्चा का विषय बन जाती है। ज्योति सिंह जिस प्रकार से कानूनी मोर्चे पर मजबूती के साथ अपनी बात रख रही हैं, उससे यह साफ होता है कि यह महज एक घरेलू अनबन नहीं, बल्कि एक गंभीर कानूनी लड़ाई बन चुका है।

अब सबकी निगाहें आगामी 12 नवंबर पर टिकी हैं, जो कि इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख है। फैंस और दोनों पक्षों के जानने वाले यह सोच रहे हैं कि क्या पवन सिंह उस तारीख पर अदालत में हाजिर होंगे या यह मामला वाकई सुप्रीम कोर्ट तक खींचा जाएगा। पवन सिंह पर लगे 3,000 रुपये के जुर्माने और ज्योति सिंह की दृढ़ता ने यह संकेत दे दिए हैं कि इस हाई-प्रोफाइल मामले का कोई भी समाधान फिलहाल आसान नहीं दिख रहा है।

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