बिहार की राजनीति में मोकामा से जेडीयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह उर्फ 'छोटे सरकार' एक बार फिर अपने अलग अंदाज और बयानों को लेकर जबरदस्त सुर्खियों में हैं। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में अपनी ही पार्टी जेडीयू के अधिकृत प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ उन्होंने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। जेडीयू का विधायक होने के बावजूद अनंत सिंह ने इस सीट से जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह को खुलकर अपना समर्थन दे दिया है और उन्हें विजयी बनाने की अपील कर रहे हैं।
नालंदा से पटना तक बैठकों का दौर और मूंछों पर ताव
अनंत सिंह अनुज कुमार सिंह के पक्ष में माहौल बनाने के लिए लगातार इलाके में सक्रिय हैं। वह हर दिन नालंदा, नवादा और पटना में ताबड़तोड़ बैठकें और चुनावी सभाएं कर रहे हैं। सभाओं के दौरान जेडीयू प्रत्याशी पर हमला बोलते हुए वह नीरज कुमार की जमानत जब्त कराने तक का दावा कर रहे हैं। रैलियों में मौजूद युवाओं और जेन-जी (Gen-Z) की फरमाइश पर अनंत सिंह मूंछों पर ताव लगाते और हवा में गमछा लहराते नजर आ रहे हैं। उनके इस आक्रामक रवैये और अनूठे अंदाज से राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी बढ़ गई है।
20 करोड़ रुपये की बाजी और दिग्गजों की साख दांव पर
इस सियासी जंग में हलचल तब और बढ़ गई जब अनंत सिंह ने नीरज कुमार की हार पर 20 करोड़ रुपये की बाजी तक लगा दी। ध्यान देने वाली बात यह है कि जिस प्रत्याशी को हराने की कसम अनंत सिंह ने खाई है, उसी नीरज कुमार के समर्थन में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत और जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा लगातार प्रचार कर रहे हैं और रैलियों पर रैलियां कर रहे हैं। ऐसे में जेडीयू के शीर्ष नेताओं के अभियान के समानांतर पार्टी के ही एक दबंग विधायक द्वारा ऐसा कदम उठाना हर किसी को हैरान कर रहा है।
पार्टी की चुप्पी, भूमिहार वोट और अंदरूनी पावर गेम
अनंत सिंह के इस बागी तेवर के बाद राजनीतिक जानकारों के बीच कई तरह के सवाल तैर रहे हैं। लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह महज दो नेताओं की निजी अदावत है या फिर पार्टी के अंदर कोई बड़ा खेल चल रहा है। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े कुछ मुख्य सवाल इस प्रकार हैं:
- क्या जेडीयू के वरिष्ठ और बड़े नेता बाहुबली अनंत सिंह पर किसी भी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से डर रहे हैं?
- क्या पार्टी को यह आशंका है कि अनंत सिंह पर कार्रवाई करने से भूमिहार वोट जेडीयू के पाले से खिसक सकता है?
- क्या नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच जारी इस तनातनी के पीछे जेडीयू के बड़े दिग्गजों का अंदरूनी पावर गेम छुपा है?
- क्या अनंत सिंह यह सब अपनी मर्जी से कर रहे हैं या फिर उन्हें पार्टी के ही किसी बड़े गुट का मौन समर्थन प्राप्त है?
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को आएंगे नतीजे
बिहार के इस एमएलसी चुनाव में अब 'पुदीना' और 'गैस' को लेकर बयानों का संग्राम पूरी तरह छिड़ चुका है। अब सभी की निगाहें चुनाव की तारीखों और नतीजों पर टिकी हुई हैं। इस सीट के लिए 23 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा, जबकि वोटों की गिनती के बाद नतीजे 27 अक्टूबर को जारी होंगे। 27 अक्टूबर को ही यह साफ हो पाएगा कि नीरज कुमार की स्थिति मजबूत रहती है या फिर अनंत सिंह का दावा सही साबित होता है।
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